वंदे मातरम के अपमान पर 3 साल की होगी जेल...गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में पेश करेंगे बिल

नई दिल्ली। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपने राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा मानने वाली केंद्र सरकार राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में अहम संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी उन राष्ट्रीय प्रतीकों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा, जिन्हें पहले से कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
वंदे मातरम के अपमान पर सख्त सजा का प्रस्ताव
संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके गायन में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा को और मजबूत करेगा।
मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में होगा पेश
गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में यह विधेयक पेश करेंगे। राज्यसभा से पारित होने के बाद इसे लोकसभा में चर्चा और मंजूरी के लिए लाया जाएगा। राजनीतिक महत्व को देखते हुए इस विधेयक पर सदन में तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
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कैबिनेट पहले ही दे चुकी है मंजूरी
केंद्र सरकार की कैबिनेट इस संशोधन को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान होता है, वहां राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन भी सुनिश्चित किया जाए।
150वीं जयंती के अवसर पर सरकार का विशेष फोकस
मोदी सरकार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं जयंती के अवसर पर वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय गीत को अधिक संस्थागत और कानूनी संरक्षण देने की पहल की गई है।
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राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है विधेयक
वंदे मातरम को लेकर वर्षों से राजनीतिक और वैचारिक मतभेद बने हुए हैं। भाजपा इसे राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानती है, जबकि कुछ विपक्षी दलों के नेताओं ने समय-समय पर इसके गायन को लेकर आपत्ति या असहमति जताई है। ऐसे में संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।












