रायगढ़ में जंगल के काले कारोबार का बड़ा खुलासा, फर्जी परमिट से करोड़ों की लकड़ी तस्करी का आरोप

रायगढ़ में पुलिस और वन विभाग ने वन तस्करी के एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोप है कि ग्रामीणों को पैसे का लालच देकर खैर और तेंदू जैसे बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई कराई जाती थी। लकड़ियों को गढ़उमरिया के एक गोदाम में जमा कर प्रोसेसिंग के बाद कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट के जरिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत दूसरे राज्यों तक भेजा जाता था। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है।
रायगढ़ में वन तस्करी के ‘इंटरस्टेट सिंडिकेट’ का भंडाफोड़
रायगढ़ पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में वन तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की कथित तौर पर अवैध कटाई कराई जाती थी।

ये भी पढ़ें: थप्पड़ का बदला लेने नाबालिग ने किया सुपरवाइजर का मर्डर, CCTV ने खोला राज
ग्रामीणों को लालच,जंगल से गोदाम तक पहुंचती थी लकड़ी
जांच के मुताबिक ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर पेड़ों की कटाई कराई जाती थी। इसके बाद ट्रैक्टर और पिकअप वाहनों के जरिए लकड़ियों को रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित गोदाम तक पहुंचाया जाता था।
गोदाम बना था कथित ‘तस्करी का ट्रांजिट पॉइंट’
पुलिस के मुताबिक रोहित मित्तल पर गोदाम किराये पर लेकर लकड़ियों को जमा कराने और अपने बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर कारोबार संचालित करने का आरोप है। वहीं ट्रांसपोर्टर भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान के जरिए लकड़ियों को दूसरे राज्यों तक भेजे जाने की बात जांच में सामने आई है।
ये भी पढ़ें: निलंबित IPS रतनलाल डांगी मामले में हाईकोर्ट सख्त,पुलिस से 7 दिन में मांगा शपथपत्र
फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट से लकड़ी को ‘वैध’ दिखाने का खेल!
जांच में सबसे अहम कड़ी फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट यानी टीपी को माना जा रहा है। पुलिस और वन विभाग के मुताबिक अवैध लकड़ियों को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर ऐसे परमिट का इस्तेमाल किया जाता था।
5 मई 2025 की रेड ने खोला बड़ा राज
वन विभाग को मई 2025 में गढ़उमरिया स्थित गोदाम में अवैध लकड़ी के भंडारण की सूचना मिली थी। इसके बाद 5 मई 2025 को वन विभाग की टीम ने गोदाम में रेड कार्रवाई की।
ये भी पढ़ें: रायपुर में आज कृष्ण जन्म की धूम,कारागार में होगा कान्हा का जन्म,जैतूसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग
ट्रक से 42 नग तेंदू के लट्ठे बरामद
कार्रवाई के दौरान ट्रक में लदे 42 नग तेंदू के लट्ठे बरामद किए गए, जिनकी मात्रा करीब 1.731 घन मीटर बताई गई। वहीं गोदाम से तेंदू और खैर के 146 नग लट्ठे बरामद हुए। इनकी मात्रा करीब 6.741 घन मीटर बताई गई।
कुल्हाड़ी से कटर मशीन तक,तस्करी का सामान जब्त
वन विभाग की कार्रवाई में वजन मशीन, कुल्हाड़ी, हथौड़ा, जलाऊ लकड़ी और कटर मशीन समेत अन्य सामान भी जब्त किया गया था।
परमिट पर नहीं मिले वन अधिकारी के हस्ताक्षर
रेड के दौरान आरोपियों की ओर से लकड़ी की ट्रांसपोर्टिंग के लिए ट्रांसपोर्ट परमिट पेश किया गया था। वन विभाग की जांच में परमिट पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। प्रथम दृष्टया दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।
ये भी पढ़ें: रायपुर में जलभराव पर फूटा युवक का गुस्सा,सरकार-महापौर को दी गालियां VIDEO वायरल
अवैध लकड़ी से कहीं बड़ा निकला पूरा नेटवर्क
जांच आगे बढ़ने पर मामला केवल अवैध लकड़ी के भंडारण तक सीमित नहीं रहा। पुलिस के मुताबिक जांच में एक संगठित और अंतर्राज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले।
2 सितंबर को थाने पहुंची वन विभाग की शिकायत
मामले में 2 सितंबर 2026 को वन विभाग की ओर से थाना जूटमिल में शिकायत दी गई। इसके बाद पुलिस ने अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज कर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, संगठित अपराध और भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की।
SSP के निर्देश पर बनी स्पेशल टीम
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश और सीएसपी मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने जांच के दौरान कथित सिंडिकेट में शामिल आरोपियों की भूमिका की तस्दीक की और अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की।
ये भी पढ़ें: ऑनलाइन अटेंडेंस के विरोध में टीचर का VIDEO वायरल, अब सस्पेंड:
तीन आरोपी गिरफ्तार...एक की तलाश जारी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है। वहीं भरत कुमार मेश्राम को फरार बताया गया है और उसकी तलाश जारी है।
ओडिशा से हरियाणा-हिमाचल तक जुड़े तार!
पुलिस और वन विभाग अब इस कथित नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक फैले कनेक्शन की जांच कर रहे हैं। जांच में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से लेकर हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश तक लकड़ियों की सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब निशाने पर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोग
पुलिस की जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, अवैध परिवहन और कथित तौर पर अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति की भी जांच की जा रही है।
ये भी पढ़ें: मंत्री के काफिले की गाड़ी पर गिरा बूम बैरियर, टोल कर्मचारी से मारपीट का VIDEO वायरल
SSP का बड़ा बयान
एसएसपी शशि मोहन सिंह के मुताबिक वन तस्करी के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों और अवैध परिवहन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जबकि फरार आरोपी की तलाश जारी है।
जंगल की कटाई से इंटरस्टेट सप्लाई तक,कितना बड़ा है नेटवर्क?
रायगढ़ में सामने आया यह मामला केवल अवैध लकड़ी के भंडारण का नहीं, बल्कि जंगलों से बेशकीमती लकड़ी काटने, उसे एक जगह जमा करने, प्रोसेसिंग करने और कथित फर्जी परमिट के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है। तीन गिरफ्तारियों के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क के पूरे आर्थिक और अंतर्राज्यीय कनेक्शन पर है।




















