अशोक गौतम, भोपाल। विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने, लैब को अपग्रेड करने में यूनिवर्सिटीज रुचि नहीं ले रहीं हैं। इसका ताजा उदाहरण केंद्र की उषा योजना के तहत जारी राशि में सामने आया है। केंद्र सरकार ने 11 महीने पहले बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल, विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन, जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर को 100-100 करोड़ रुपए जारी किए थे। यह राशि इन यूनिवर्सिटीज को नए भवन बनाने, रेनोवेशन करने, अपग्रेडेशन करने और लैब, कम्प्यूटर सहित अन्य सामग्री खरीदने के लिए दी गई थी। यूनिवर्सिटीज यह राशि 8 से 9 माह तक रखी रहीं, पर काम नहीं किया। इसके बाद जब उच्च शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी कि अगर आप इसे खर्च नहीं कर रहे तो हम इसे अन्य यूनिवर्सिटीज को दे देंगे। इसके बाद यूनिवर्सिटीज ने सरकार से वादा किया है कि वे तीन से चार माह के अंदर पूरी राशि यूज कर लेंगे और आनन-फानन में टेंडर जारी कर दिए गए।
सूत्रों के अनुसार यूनिवर्सिटीज में लगभग एक साल में 20 से 25 करोड़ के काम ही जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में यूनिवर्सिटीज प्रबंधनों की दलील है कि किसी भी काम में समय लगता है। वहीं बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के छात्र प्रशांत उपाध्याय का कहना है कि लैब में कुछ उपकरण और फर्नीचर नहीं हैं। कई महीनों से खरीदी की बात यूनिवर्सिटी प्रबंधन कर रहा है, लेकिन आज तक खरीदी नहीं हुई।
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी, महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी, एपीएस यूनिवर्सिटीज, पंडित एसएन शुक्ला यूनिवर्सिटी जबलपुर को 20-20 करोड़ रुपए जनवरी 2024 में जारी हुए थे। इंदौर के अलावा अन्य यूनिवर्सिटी ने पूरी तरह राशि का उपयोग नहीं किया है।
साल 2024 में औबेदुल्लागंज, झाबुआ, ब्यावरा सहित प्रदेश के 27 महाविद्यालयों को 5-5 करोड़ रु दिए गए थे। इन कॉलेजों ने भी अभी तक राशि खर्च नहीं की है। इसमें से 20 कॉलेजों ने निधि का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया है। इसी तरह के कामों के लिए सतना, छतरपुर और बड़वानी कॉलेज को 10-10 करोड़ रुपए दिए गए थे। यहां भी यही हालात हैं।
यह किसने बोला कि यूनिवर्सिटी ने राशि का उपयोग नहीं किया। पहले आप पता करें कि कितनी राशि खर्च की, इसके बाद बात करें।
सुरेन्द्र कुमार जैन, कुलपति, बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, भोपाल
विक्रम यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य शुरू हो गया है, रेनोवेशन का काम चालू है। जल्द ही अन्य कार्य कराए जाएंगे।
अर्पण भारद्वाज, कुलपति, विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन
मेरे यहां दस करोड़ का काम हुआ है। कुछ उपकरण, कंप्यूटर, लैब सामग्री की खरीदी की है। निर्माण कार्यों सहित अन्य कार्यों के लिए तैयारी की जा रही है।
राजेश वर्मा, कुलपति, रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी, जबलपुर
उषा योजना के तहत एक-दो साल पहले राशि दी गई थी। कुछ विवि और कॉलेजों ने राशि का उपयोग पूरी तरह से नहीं किया है। अब इस राशि के उपयोग करने के लिए कहा है।
अनुपम राजन, एसीएस, उच्च शिक्षा विभाग