उज्जैन। भारत और न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में होने वाले निर्णायक वनडे मैच से पहले टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और कुलदीप यादव महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। दोनों ने त्रिपुंड (तिलक) लगवाया और फिर भस्म आरती में शामिल हुए। करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर आरती और जाप कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।
बता दें कि, भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज 1-1 की बराबरी पर है और आखिरी निर्णायक मैच 18 जनवरी को इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा।
शनिवार सुबह करीब 4 बजे विराट कोहली और कुलदीप यादव महाकाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने त्रिपुंड (तिलक) लगवाया और भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का पूजन किया। दोनों खिलाड़ी लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर आरती में जाप करते नजर आए। भस्म आरती के बाद विराट और कुलदीप ने भगवान को जल अर्पित किया। फिर नंदी जी का पूजन अर्चन कर भगवान महाकाल के देहरी से दर्शन किए। इस मौके पर मंदिर समिति ने दोनों का सम्मान किया।
कुलदीप यादव ने कहा, महाकाल मंदिर आकर बहुत अच्छा लगा। क्रिकेट के साथ-साथ अपनी जिंदगी में भी अच्छा करते रहें। भगवान महाकाल का आशीर्वाद टीम और सभी पर बना रहे। यह दर्शन अनुभव हमेशा याद रहेगा।
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर शुक्रवार को आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने हवन-अनुष्ठान में भाग लिया और वैदिक मंत्रोच्चार किया। पूजा के बाद गंभीर ने माता के दरबार में समय बिताया और मुख्य पुजारी ने उन्हें चुनरी ओढ़ाई।
इसी तरह केएल राहुल भी उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचे और भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस प्रकार टीम इंडिया के अधिकांश खिलाड़ी मैच से पहले अपनी आस्था और शुभकामनाओं के लिए तीर्थस्थलों में दर्शन करने पहुंचे।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला 18 जनवरी को इंदौर में खेला जाएगा। दोनों टीमों ने अब तक एक-एक मैच जीता है। इसलिए इंदौर में खेले जाने वाला मैच न केवल सीरीज का निर्णायक होगा, बल्कि टीम इंडिया के लिए मानसिक और रणनीतिक तैयारी का भी महत्वपूर्ण मोड़ है।
टीम इंडिया के खिलाड़ी अक्सर अपने व्यस्त शेड्यूल में भी तीर्थस्थलों में दर्शन करने समय निकालते हैं। विराट कोहली और कुलदीप यादव ने पहले भी नैनीताल के किआचि धाम और वृंदावन में दर्शन किए हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम की खासियत है कि खिलाड़ी खेल में उत्कृष्टता के साथ-साथ आध्यात्मिक आस्था और संस्कृति को भी महत्व देते हैं। पूर्व क्रिकेटर्स जैसे सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, कपिल देव, सुनील गावस्कर भी मैदान पर प्रदर्शन के साथ-साथ तीर्थस्थलों के दर्शन करते रहे हैं। यह परंपरा न केवल खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास के लिए जरूरी है, बल्कि फैंस के लिए भी प्रेरणादायक है।
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