भोपाल। राजधानी भोपाल के स्लॉटर हाउस सील होने के एक हफ्ते बाद भी स्लॉटरिंग एरिया की फॉरेंसिक जांच न होना जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। निगम ने जहां स्लॉटर हाउस को सील कर कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, वहीं अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि घटनास्थल से वैज्ञानिक जांच आखिर क्यों नहीं कराई गई।
अब तक नहीं पहुंची फॉरेंसिक टीम
जानकारी के मुताबिक स्लॉटर हाउस में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और न ही स्लॉटरिंग एरिया से सैंपल लेकर जांच की गई। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते फॉरेंसिक जांच होती तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते थे।
CCTV की रिकॉर्डिंग कहा गई?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या स्लॉटर हाउस में CCTV कैमरे चालू थे और अगर थे तो उनकी रिकॉर्डिंग कहां है। साथ ही यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नगर निगम के पास स्लॉटर हाउस संचालन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां थीं या नहीं। इधर, विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
उनका कहना है कि केवल सीलिंग और निलंबन से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच जरूरी है। अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं कि वे फॉरेंसिक जांच कब कराते हैं और स्लॉटर हाउस से जुड़ी अनियमितताओं की पूरी सच्चाई जनता के सामने कब आएगी।





















