Shivani Gupta
31 Jan 2026
Shivani Gupta
31 Jan 2026
Manisha Dhanwani
31 Jan 2026
आज सुबह इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहर के विकास कार्यों को लेकर एक अहम समीक्षा बैठक ली। बैठक में प्रशासनिक एजेंडे के साथ-साथ राजनीतिक माहौल भी चर्चा में रहा। गंभीर मुद्दों के बीच नेताओं के हल्के-फुल्के संवाद ने माहौल को कुछ देर के लिए सहज और रोचक बना दिया।
बैठक के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को लेकर मज़ाकिया अंदाज़ में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंदौर में अधिकारी अक्सर प्रभारी मंत्री का नाम लेकर हमें “चमकाते” थे और हम तो हमेशा मुख्यमंत्री को ही इंदौर का प्रभारी मंत्री मानते आए हैं। इस टिप्पणी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुस्कुरा उठे और तुरंत जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वे प्रभारी मंत्री नहीं हैं, लेकिन जिन जिलों में प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी खाली है, वह दायित्व उनके पास है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद सभागार में हल्की हंसी और सौहार्दपूर्ण माहौल बन गया।
कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर बधाई
बैठक की शुरुआत में कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज़ हुई है और इंदौर को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित भी किया।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी, दिखी सियासी एकजुटता
इस विकास समीक्षा बैठक में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, मंत्री तुलसी सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मैंदोला, गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़ सहित सांसद शंकर लालवानी, महेंद्र हार्डिया और मधु वर्मा ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। सभी जनप्रतिनिधियों ने इंदौर के विकास को लेकर अपने-अपने सुझाव भी रखे।
विकास सर्वोपरि, लापरवाही पर सख्त रुख
पूरी बैठक का फोकस विकास पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि प्रशासनिक कामकाज में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर के विकास कार्य प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं और तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ इन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
विकास की समीक्षा के बीच सियासी संवाद, हल्का हास्य और सख्त निर्देश—इस बैठक ने साफ कर दिया कि इंदौर को लेकर सरकार का रुख गंभीर भी है और प्रतिबद्ध भी।