People's Sting : भोपाल कबाड़खाने में सिर्फ 100 रुपए के स्टांप पर बिक जाती है बिना कागजों की बाइक या कार, खरीदना भी आसान!

मप्र की राजधानी भोपाल के कबाड़खाने में बिना पेपर्स के गाड़ियों की खरीद-फरोख्त चल रही है। पुराने शहर की 24 से ज्यादा दुकानों में यह गोरख धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। पीपुल्स रिपोर्टर ने इसकी पूरी पड़ताल की....
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People's Sting : भोपाल कबाड़खाने में सिर्फ 100 रुपए के स्टांप पर बिक जाती है बिना कागजों की बाइक या कार, खरीदना भी आसान!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। क्या आपके पास कोई कंडम वाहन हैं, उसके वैध दस्तावेज भी नहीं हैं। अगर आप इस गाड़ी को बेचना चाहते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। पुराने शहर के कबाड़खाने पहुंच जाइए, यहां खुलेआम बिना कागजों के कंडम वाहनों की खरीद-फरोख्त होती है। यह खुलासा पीपुल्स समाचार की पड़ताल में हुआ। 

    न पुलिस की रोक-टोक, न प्रशासन की सख्ती

    रिपोर्टर ने दो स्टिंग ऑपरेशन किए। इसके मुताबिक यहां के दुकानदार दावा करते हैं कि यहां पर कंडम वाहनों को आसानी से बेचा जा सकता है। इसके लिए उन्हें वाहनों के पेपर की जरूरत नहीं होती है, सिर्फ बेचने वाले के आधार कार्ड और 100 रुपए के स्टांप के आधार पर यहां कंडम गाड़ी बेची जा सकती हैं। रोचक बात यह है कि यहां यह काम खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन ना तो पुलिस की कोई रोकटोक है, ना ही प्रशासन की सख्ती। पीपुल्स समाचार संवाददाता स्टिंग ऑपरेशन करने लिए कबाड़खाने में ग्राहक बनकर गया। जब यहां गाड़ी की खरीद-फरोख्त का सौदा हुआ तो ये तक पूछा गया कि गाड़ी कहां से लाए, कहीं चोरी की तो नहीं।

    दुकानदार उस्मान अली से बातचीत

    रिपोर्टर : भाई कार बेचनी है, खरीद लोगे क्या?

    दुकानदार : हां हां... पूरा मार्केट ही इसका है, कौन सी है, कब का मॉडल है?

    रिपोर्टर : मारुति ऑल्टो 2004 मॉडल, रनिंग कंडीशन में है।

    दुकानदार : कागज हैं या नहीं?

    रिपोर्टर : नहीं है, इसलिए तो आपके पास आए हैं।

    दुकानदार : 25 हजार में लेंगे (थोड़ी बातचीत के बाद 30 हजार में बात फाइनल हो गई)

    रिपोर्टर : कागज नहीं हैं, कोई दिक्कत तो नहीं।

    दुकानदार : काहे की दिक्कत.. सालों से यही काम कर रहे हैं। गाड़ी आते ही कटवा देंगे।

    रिपोर्टर : हमारे पास कोई प्रूफ कैसे रहेगा? कोई लफड़ा तो नहीं होगा ?

    दुकानदार : आपके आधार कार्ड की कॉपी लगेगी, 100 रुपए का एग्रीमेंट बनेगा।

    रिपोर्टर : गाड़ी कैसे लोगे?

    दुकानदार : वॉट्सऐप पर गाड़ी का फोटो व एड्रेस भेज दो, हम उठवा लेंगे। 

    दुकानदार शाहिद से बातचीत

    रिपोर्टर : भाई एक ऑल्टो है 2005 मॉडल, बेचनी है।

    दुकानदार : हो जाएगा, 23 हजार रुपए, गाड़ी उठाने की जिम्मेदारी हमारी। कागज हैं कि नहीं?

    रिपोर्टर : मेरे नाम से ही रजिस्टर्ड है, लेकिन कागज नहीं है।

    दुकानदार : गाड़ी का फोटो है चलती है? या बंद पड़ी है?

    रिपोर्टर : हां चलती है, कागज नहीं है इसलिए बेच रहे हैं। फोटो मैं भेज दूंगा। कागज नहीं है, फिर कैसे लोगे, कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना?

    दुकानदार : आपके आधार कार्ड की फोटो कॉपी लगेगी। स्टांप पेपर पर पूरी लिखा पढ़ी होगी। फिर सारी जिम्मेदारी हमारी

    रिपोर्टर : आप लोग पुरानी गाड़ी का क्या करते हो

    दुकानदार : कबाड़ में कटवा देते हैं, वो देखो स्क्रैप सेंटर है। (हाथ के इशारे से बताता हुआ) यहां गाड़ी कटने के बाद आपको चेचिस नंबर काटकर दे देंगे।

    रिपोर्टर : कब उठाएंगे, थोड़े बहुत पैसे और बढ़ाओ।

    दुकानदार : नंबर ले लो, इस पर गाड़ी के फोटो व पता दे देना, पैसों की भी बात कर लेंगे।

    तीन साल बाद पुलिस ने पकड़ा, जुर्माना लगाकर छोड़ा

    कोहेफिजा निवासी किशनलाल (65) ने अपनी कार कबाड़ी को बेच दी। तीन साल बाद उन्हें थाने से सूचना आई कि उनकी गाड़ी से एक एक्सीडेंट हुआ है। किशनलाल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने गाड़ी तीन साल पहले बेच दी, लेकिन पुलिस ने बात नहीं मानी। कई दिनों तक परेशान होने के बाद पुलिस ने जुर्माना लगाते हुए उन्हें छोड़ दिया। 

    सरकारी स्क्रैप सेंटर सुरक्षित

    सरकारी स्क्रैप सेंटर पर गाड़ी के अनैतिक उपयोग की संभावना नहीं होती। यही नहीं यहां से मिले स्क्रैप सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदने पर कंपनी और राज्य सरकार की ओर से रोड टैक्स में और गाड़ी की कीमत पर छूट दी जाती है। राजधानी भोपाल में बिलखिरिया और अयोध्या बायपास पर सरकारी स्क्रैप सेंटर हैं। 

    ये है नियम

    पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए परिवहन विभाग के सख्त नियम हैं। कमर्शियल वाहनों  और निजी वाहनों के लिए 15 साल बाद री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। यही नहीं इन गाड़ियों के स्क्रैप के लिए शहर में तीन अधिकृत स्क्रैप सेंटर चल रहे हैं। इसके बावजूद लोग कबाड़ियों को वाहन बेच रहे हैं।

    एक्सपर्ट बोले-सावधान रहें, चोरी के वाहन हो सकते हैं

    आरटीओ एक्सपर्ट प्रदीप खंडेलवाल बताते हैं कि बिना दस्तावेजों के वाहनों को खरीदने से चोरी के वाहनों को कबाड़ किए जाने की आशंका भी बनी रहती है। कोई भी व्यक्ति गाड़ी चोरी कर यहां कटवा सकता है। ऐसे में पकड़े जाने पर गाड़ी मालिक पर नियम के अनुसार कार्रवाई भी  हो सकती है।

    सीधी बात-जितेन्द्र शर्मा आरटीओ

    सवाल : कबाड़खानों में बिना रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और स्क्रैप सर्टिफिकेट के गाड़ियां खुलेआम खरीदी-बेची जा रही हैं। क्या यह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन नहीं है?

    आरटीओ : हां, बिना वैध दस्तावेजों के वाहन खरीद-फरोख्त अवैध है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।

    सवाल : अगर यह अवैध है, तो शहर के कबाड़खानों में यह धंधा इतने समय से कैसे चल रहा है? क्या आरटीओ की नियमित निगरानी नहीं होती?

    आरटीओ : यहां पुलिस और जिला प्रशासन कार्रवाई करते हैं। आरटीओ द्वारा भी समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है।

    सवाल : बिना कागजों की गाड़ियों का इस्तेमाल अपराध, दुर्घटना या फर्जी नंबर प्लेट के लिए हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

    आरटीओ : ऐसी स्थिति में वाहन बेचने वाला, खरीदने वाला और दुकानदार, तीनों दोषी माने जाएंगे। नियमानुसार उन पर कार्रवाई की जा सकती है।

    सवाल : क्या कबाड़खानों का आरटीओ में पंजीकरण अनिवार्य नहीं है? और क्या सभी कबाड़खानों की सूची विभाग के पास मौजूद है?

    आरटीओ : जी हां, अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य है। केवल पंजीकृत स्क्रैप सेंटर को ही वाहन काटने या खरीदने की अनुमति है।

    सवाल :  इस फजीवार्ड़े पर कब तक ठोस कार्रवाई होगी? क्या आम नागरिक लिखित शिकायत कर सकता है?

    आरटीओ : कोई भी नागरिक आरटीओ कार्यालय में लिखित शिकायत दे सकता है। पुलिस और प्रशासन के माध्यम से जांच के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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