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ब्रिटेन में अमेरिकी बेस के पास विस्फोटकों से गांव खाली, ईरान की धमकी के बीच बढ़ी चिंता

ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस के पास विस्फोटकों के कारण एक गांव खाली कराया गया। इस अमेरिकी एयरबेस को ईरान पहले वैध निशाना बता चुका है, हालांकि घटना का ईरान से सीधा संबंध अभी सामने नहीं आया है।
ब्रिटेन में अमेरिकी बेस के पास विस्फोटकों से गांव खाली, ईरान की धमकी के बीच बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर में स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस के पास एक गांव को विस्फोटकों के कारण खाली कराया गया है। अधिकारियों ने सुरक्षा को देखते हुए गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया। यह एयरबेस यूरोप में अमेरिकी भारी बमवर्षक विमानों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि गांव की निकासी या हुई गिरफ्तारियों का ईरान की धमकी से कोई सीधा संबंध है।

विस्फोटकों के कारण गांव खाली कराया गया

स्थानीय प्रशासन ने विस्फोटकों की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गांववासियों को वहां से बाहर निकाला। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और मामले की जांच जारी है। आरएएफ फेयरफोर्ड के पास अचानक हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई। अधिकारियों की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विस्फोटक कहां मिले और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। आधिकारिक तौर पर इस घटना को ईरान से जोड़ने की पुष्टि भी नहीं हुई है।

अमेरिकी भारी बमवर्षकों का प्रमुख ठिकाना है फेयरफोर्ड

आरएएफ फेयरफोर्ड लंबे समय से अमेरिकी वायु सेना की गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह यूरोप में उन प्रमुख स्थानों में शामिल है, जहां अमेरिका अपने भारी बमवर्षक विमानों को तैयार रखता है। मार्च में यहां 21 अमेरिकी बमवर्षक विमानों का जमावड़ा हुआ था। इनमें बी-1 लैंसर और बी-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस जैसे विमान शामिल थे। इसे शीत युद्ध के बाद ब्रिटिश धरती पर सबसे बड़ा अमेरिकी बमवर्षक जमावड़ा बताया गया था। फिलहाल बेस पर पांच बी-1 लैंसर मौजूद हैं।

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ईरान ने फेयरफोर्ड को बताया था वैध निशाना

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने आरएएफ फेयरफोर्ड को वैध निशाना करार दिया था। इसकी वजह इस बेस पर अमेरिकी भारी बमवर्षक विमानों की मौजूदगी और ब्रिटेन की सैन्य भूमिका बताई गई है। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टारमर ने शुरुआत में अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों से ईरान पर हमला करने की अनुमति देने से इनकार किया था। हालांकि, युद्ध शुरू होने के कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना रुख बदला और ब्रिटिश ठिकानों से अमेरिकी गतिविधियों के लिए नई पहुंच को रक्षात्मक बताया। इसके बाद ईरान की ओर से धमकियां बढ़ने की बात सामने आई थी। ऐसे में फेयरफोर्ड के पास हुई यह घटना सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े करती है।

ईरान से संबंध की अभी पुष्टि नहीं

गांव को खाली कराने की कार्रवाई और ईरान की धमकियों के बीच एक समान पृष्ठभूमि जरूर है, लेकिन दोनों के बीच सीधा संबंध अभी सामने नहीं आया है। रिपोर्ट में भी स्पष्ट किया गया है कि आज हुई गिरफ्तारियां ईरान की धमकी से जुड़ी हैं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोटकों से जुड़े मामले की स्थिति और इसके पीछे की वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

फेयरफोर्ड जैसे सैन्य ठिकानों की मौजूदगी से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को फायदा मिलता है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बने रहते हैं। किसी सैन्य ठिकाने को संभावित निशाना बताए जाने के बाद उसके आसपास के इलाकों पर भी इसका असर पड़ सकता है। गांव की निकासी के कारण स्थानीय लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। फिलहाल गांववासी सामान्य स्थिति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और उनके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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