Garima Vishwakarma
24 Jan 2026
अगर आजकल कॉलेज कैंपस, व्हाट्सऐप ग्रुप या चाय की दुकान पर पढ़ाई से जुड़ी बातें हो रही हैं, तो एक नाम बार-बार सुनाई दे रहा है UGC Equity Regulations 2026। कई लोग इसे छात्रों के हक में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे गैर-जरूरी विवाद कह रहे हैं। सवाल वही है आखिर इसमें ऐसा क्या है, जिससे इतना शोर मचा हुआ है? चलिए, पूरे मुद्दे को समझते हैं।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने जनवरी 2026 से देशभर के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का फोकस एक ही बात पर है कैंपस में हर छात्र को बराबरी और सम्मान मिलना। UGC का मानना है कि आज भी कई संस्थानों में छात्रों के साथ उनकी जाति, जेंडर, सामाजिक स्थिति या बैकग्राउंड के आधार पर अलग व्यवहार किया जाता है। नया नियम इसी सोच को खत्म करने के लिए लाया गया है। ये नियम 2012 में बने पुराने दिशा-निर्देशों की जगह लेंगे, जिन्हें अब समय के हिसाब से कमजोर माना जा रहा था।
सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक Equity Cell बनाना जरूरी होगा चाहे संस्थान सरकारी हो या प्राइवेट। इस सेल की जिम्मेदारी भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनना, उनकी निष्पक्ष जांच करना और समय पर फैसला लेना होगी। अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ गलत व्यवहार हुआ है, तो उसे अब इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी। सीधे इक्विटी सेल में शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।
जब मकसद अच्छा है, तो विरोध क्यों? असल में विवाद की जड़ दो बड़े सवालों से जुड़ी है।
पहला सवाल: OBC को क्यों शामिल किया गया?
नए नियमों में OBC वर्ग को भी जातिगत भेदभाव के दायरे में रखा गया है। इसी बात पर सबसे ज्यादा बहस हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि OBC वर्ग को पहले से आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें इस सूची में रखना बाकी छात्रों के लिए असंतुलन पैदा कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ तर्क यह भी है कि सिर्फ सरकारी सुविधाएं मिलने से सामाजिक भेदभाव अपने आप खत्म नहीं हो जाता।
दूसरा सवाल: पढ़ाई की क्वालिटी का क्या?
सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब भारतीय यूनिवर्सिटीज पहले ही अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में पीछे हैं, तो ध्यान पढ़ाई, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होना चाहिए। उनका मानना है कि ज्यादा नियम बनाने से कहीं न कहीं कैंपस का माहौल और ज्यादा संवेदनशील और तनावपूर्ण हो सकता है। कुछ लोग इसे misuse की आशंका से भी जोड़ रहे हैं।
सीधी भाषा में कहें तो कॉलेज प्रशासन अब शिकायतों को नजरअंदाज नहीं कर पाएगाष। छात्रों को अपनी बात रखने का एक औपचारिक मंच मिलेगा। कैंपस में व्यवहार को लेकर सतर्कता बढ़ेगी। कुछ लोग इसे कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा कवच मान रहे हैं, जबकि कुछ को डर है कि इससे छात्रों के बीच दूरी और गलतफहमियां बढ़ सकती हैं।
UGC के ये नियम कागजों पर अच्छे लगते हैं, लेकिन असली परीक्षा इनके इम्प्लीमेंटेशन की होगी।अगर कॉलेज इन्हें संतुलन और ईमानदारी से लागू करते हैं, तो कैंपस का माहौल बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर नियमों का इस्तेमाल दबाव या बदले के हथियार की तरह हुआ, तो विवाद और बढ़ सकता है।