26 जनवरी 2026 को भारत 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। यह दिन इसलिए खास है क्योंकि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ था और भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और गणराज्य देश बन गया था। हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड होगी, जिसमें देश की विविधता, संस्कृति और सैन्य ताकत का शानदार प्रदर्शन दिखेगा।
77वां गणतंत्र दिवस समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समारोह की अध्यक्षता करेंगी।
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा वायुसेना का भव्य फ्लाईपास्ट होगा। इस बार वायुसेना सिंदूर फॉर्मेशन दिखाएगी, जो ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े लड़ाकू विमानों पर आधारित है। यह फॉर्मेशन भारत की वायु शक्ति, तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को दिखाएगा।
फ्लाईपास्ट में शामिल होंगे-
इन विमानों के साथ आसमान में शानदार करतब दिखाए जाएंगे, जो दर्शकों को रोमांचित कर देंगे।
गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी। जिसमें 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होंगी और 13 झांकियां केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी। इन झांकियों में देश की संस्कृति, कला, विकास और आत्मनिर्भरता को दर्शाया जाएगा। जैसे- असम की टेराकोटा कला, मणिपुर की कृषि प्रगति, हिमाचल प्रदेश की देवभूमि पहचान, भारतीय वायुसेना की वेटरन्स झांकी। इन झांकियों की मुख्य थीम है- स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम् और समृद्धि का मंत्र आत्मनिर्भर भारत।
इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेतृत्व को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन होंगे।
परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वे कर्तव्य पथ स्थित सलामी मंच पर पहुंचकर परेड का निरीक्षण करेंगे।
इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में लगभग 10,000 विशेष अतिथि शामिल होंगे। इनमें शामिल हैं-
यह सभी भारत की विविधता और ताकत को दर्शाते हैं।
राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 जनवरी की शाम 7 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगी। यह भाषण पहले हिंदी और फिर अंग्रेजी में दूरदर्शन और आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाएगा। बाद में इसे विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी सुनाया जाएगा।