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Peoples Update Special :पत्नियों को पसंद नहीं गांव की बंदिशें, पतियों को पैतृक स्थान से लगाव

अपने गांव की मिट्टी से लगाव भी अब परिवारों की विवाद की वजह बन रहा है। वो इसलिए क्योंकि पति तो अपने गांव या पैतृक स्थान से लगाव रखते हैं लेकिन उनकी पत्नियां गांव की बंदिशों में रहना नहीं चाहतीं। ऐसे 100 से ज्यादा मामले प्रदेश के फैमिली कोर्ट में विचाराधीन हैं।
पत्नियों को पसंद नहीं गांव की बंदिशें, पतियों को पैतृक स्थान से लगाव
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला ’ भोपाल। इस हफ्ते भोपाल में ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको चौंका दिया। पति ने गला घोंटकर पत्नी की हत्या कर दी। सामने आया कि पत्नी भोपाल से सटे गांव में न रहकर भोपाल में रहने की जिद पर अड़ी थी। जब फैमिली कोर्ट ने ऐसे मामलों पर नजर डाली तो प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में शहर में रहने की जिद के 187 मामले विचाराधीन पाए गए। पति गांव को छोड़ना नहीं चाहते। वहीं, शहर में रहने की इच्छा के चलते पत्नियों ने कोर्ट में तलाक या भरण-पोषण के केस दायर किए हैं। 

    खेती नहीं छोड़ना चाहता पति

    भोपाल के समीप गांव में रहने वाले पति ने बताया कि पत्नी चार साल की बेटी के साथ बीते तीन साल से अपने मायके भोपाल में है।  पत्नी ने कहा कि उसे लगा था पति भाइयों की तरह शहर में रहेगा। वहीं पति का कहना है कि वो खेती और माता-पिता को छोड़ नहीं सकता।  

    गांव में नहीं बिताना चाहती जिंदगी

    इंदौर कोर्ट में पत्नी ने तलाक और भरण-पोषण का केस लगाया है। पत्नी ने कहा वह रीवा के पास गांव में रही है। वह पूरी जिंदगी गांव में नहीं बिताना चाहती थी, इसलिए पति की पुणे में जॉब को देखकर शादी के लिए हां कही। 2021 में जॉब जाने के बाद पति पैतृक गांव लौट आए।  पत्नी ने कहा कि वह चाहती है कि पति इंदौर में शिफ्ट हो जाएं। इससे गांव में रह रहे परिवार से दूरी भी नहीं रहेगी, लेकिन पति तैयार नहीं है। पत्नी ने कहा कि छह साल पुणे में रहने के बाद अब वह और बड़े होते बच्चे गांव में नहीं रह सकते।  मामले में पत्नी इंदौर में किराए के मकान में रह रही है। वहीं पति सौरभ का कहना है कि वह अभी इंदौर सिटी का खर्च वहन करने की हालत में नहीं है।

    महिलाओं को समझाइश दी जा रही

    अब महिलाएं बंदिश नहीं चाहती। गांव में सामाजिक बंधन अधिक हैं। काउंसलिंग में महिलाओं को समझाते हैं कि अब गांवों में भी अच्छी एजुकेशन है। यदि फिर भी बच्चों की खातिर वह फैसला लेती हैं तो परिवार में सामंजस्य बैठाकर उन्हें समझाएं। 

    शैल अवस्थी, काउंसलर फैमिली कोर्ट

    कहां कितने मामले विचाराधीन

    इंदौर           54

    भोपाल        45

    जबलपुर      51

    ग्वालियर    37

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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