Aakash Waghmare
14 Jan 2026
किताबें वही हैं, क्लासरूम वही हैं, सपने भी वही हैं लेकिन अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की कीमत पहले जैसी नहीं रही। देश की सबसे प्रतिष्ठित पब्लिक यूनिवर्सिटी DU ने एक बार फिर फीस बढ़ाकर छात्रों और पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी छह महीने के भीतर दूसरी बार की गई है, जिसने सस्ती उच्च शिक्षा की परिभाषा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एकेडमिक सेशन 2026-27 से इंस्टीट्यूशन लेवल सुविधाओं और सेवाओं से जुड़ी फीस बढ़ाने का फैसला लिया है। जुलाई 2025 में जहां यूनिवर्सिटी का हिस्सा 3,500 रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 4,100 रुपए कर दिया गया है। इसका मतलब है कि सिर्फ छह महीनों में DU की फीस में 17 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
लेटेस्ट संशोधन के बाद यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फंड और यूनिवर्सिटी सुविधाओं व सेवाओं का चार्ज, दोनों को 1,750-1,750 रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा
इन सभी को जोड़ने पर छात्रों से ली जाने वाली कुल फीस में DU का हिस्सा 4,100 रुपए हो गया है।
अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें, तो फीस बढ़ोतरी का ट्रेंड साफ दिखता है। 2022 में यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फंड 900, 2023 में 1,000, 2024 में 1,200, 2025 में 1,500, 2026 में 1,750 हो गया है। इसी तरह यूनिवर्सिटी सुविधाओं और सेवाओं का चार्ज 2022 में 500 रुपए था, जो अब 1,750 रुपए तक पहुंच गया है। यानी कुछ मदों में फीस चार साल में तीन गुना से ज्यादा हो चुकी है।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी फीस बढ़ने का सीधा असर कॉलेजों की कुल फीस पर पड़ रहा है। कई टॉप कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट कोर्स की फीस अब प्रति सेमेस्टर 30,000 से 40,000 रुपए तक पहुंच चुकी है।
प्रिंसिपलों का मानना है कि यह बढ़ोतरी खाकर मिडिल क्लास और EWS कैटेगरी के छात्रों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।
DU जैसी पब्लिक यूनिवर्सिटी में देशभर से अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में बार-बार फीस बढ़ना एक चिंताजनक संकेत माना जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, समस्या सिर्फ फीस की राशि नहीं, बल्कि उसकी नियमितता है। हर कुछ महीनों में फीस बढ़ने से छात्रों की आर्थिक योजना गड़बड़ा जाती है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले भी फीस बढ़ोतरी को बढ़ते ऑपरेशनल खर्च और महंगाई से जोड़ता रहा है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सुविधाओं और यूनिवर्सिटी-लेवल सेवाओं को बनाए रखने के लिए हर साल करीब 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ाना जरूरी है।
हालांकि, इस बार की 17 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी पर अब तक DU की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।