Naresh Bhagoria
25 Jan 2026
Garima Vishwakarma
25 Jan 2026
Hemant Nagle
25 Jan 2026
अशोक गौतम, भोपाल। सरकार अब शहरी क्षेत्रों से सटे गांवों में बिना प्लान के बस रही अवैध कॉलोनियों पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है। नगर निगम की सीमा से 16 किमी के दायरे में प्लॉटिंग करने पर कॉलोनाइजर अथवा भूमि स्वामी को उसी तरह से नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) अनुमति लेना होगा, जैसे शहरों में लेनी होती है। अवैध कॉलोनी अधिनियम का ड्राफ्ट बनाकर तैयार है, जिसे विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश किया जाएगा। अधिनियम के अनुसार नगर परिषद की सीमा से आठ, अन्य नगरीय क्षेत्र की सीमा से तीन और TNCP द्वारा जारी निवेश क्षेत्र से आठ किमी दूरी पर कॉलोनी बनाने के लिए तमाम अनुमतियां लेना जरूरी होगा। बिना अनुमति के कॉलोनी बनाने पर कॉलोनाइजर, 7 से 10 साल तक सजा और 50 लाख से 1करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।
अधिनियम लागू होने के बाद पंचायतीराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में भी संशोधन करना होगा, क्योंकि शहरी क्षेत्रों के आस-पास सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां गांवों में हैं। शहर बढ़ने, परिसीमन, नए मास्टर प्लान और प्लान एरिया तय करने के बाद ये कॉलोनियां शहर के अंदर हो जाती हैं। इसका खामियाजा नगर निगम को भुगतना पड़ता है। नगर निगम, जन प्रतिनिधियों और सरकार का करोड़ों रुपए इन कॉलोनियों की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में खर्च होते हैं।
नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे के दो किमी की परिधि में अगर कॉलोनाइजर कॉलोनियां विकसित करता है अथवा प्लॉटिंग करता है तो उसे इसकी अनुमति टीएनसीपी लेना होगा।
कॉलोनाइजर को कॉलोनी काटने की डीम्ड अनुमति दी जाएगी। आवेदन के 45 दिन के अंदर अगर ननि, टीएनसीपी से अनुमति नहीं दी जाती या किसी तरह से जवाब नहीं दिए जाते हैं तो माना जाएगा कि कॉलोनी काटने पर निगम की सहमति है।
अवैध कॉलोनी की सूचना मिलने के सात दिन के अंदर एफआईआर से लेकर तमाम तरह की कार्रवाई की जाएगी। अगर अवैध कॉलोनी की सूचना अथवा शिकायत कलेक्टर को मिलती है और कॉलोनाइजर कार्रवाई नहीं होती है तो कलेक्टर इसके जिम्मेदार होंगे। बिना अनुमति के कॉलोनाइजर अगर कॉलोनी काटता है तो सूचना मिलने पर कलेक्टर भूखंड को राजसात कर लेगा। राजसात करने के बाद भूखंड बेचकर उस क्षेत्र का विकास किया जाएगा। विकास के बाद ही प्लॉटिंग होगी और आवंटियों को भूखंड दिया जाएगा।
इससे कॉलोनियां प्लानिंग कर बसाई जाएंगी। ननि सीमा में शामिल होने से निकायों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त राशि नहीं खर्च करना पड़ेगी। रहवासियों को सुविधा होगी। इसके अलावा सरकार को बड़ा राजस्व मिलेगा।
प्रदेश में करीब 8000 अवैध कॉलोनियां हैं। इसमें से तीन हजार अवैध कॉलोनियों को वैध करने की औपचारिकताएं पूरी की गर्इं। यह सभी कॉलोनियां साल 2016 से पहले की थी। बाकी को वैध करने की प्रक्रिया चल रही है।
अवैध कॉलोनी अधिनियम में संशोधन करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण लगेगा। अवैध कॉलोनी बसने पर कॉलोनाइजर, भूमि स्वामी और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास