Toxic Movie Review: ‘टॉक्सिक’ का क्लाइमैक्स देख उड़े होश! यश के खूंखार अवतार ने मचाया तहलका, आखिर क्या है इतना खास?

एंटरटेनमेंट डेस्क। साउथ सुपरस्टार यश की मच अवेटेड फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ आखिरकार 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म ‘KGF Chapter 2’ के बाद यश की बड़े पर्दे पर वापसी है, इसलिए रिलीज से पहले ही इसे लेकर जबरदस्त माहौल बना हुआ था। फिल्म को लेकर शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं, लेकिन एक बात पर काफी हद तक सहमति नजर आ रही है- यश की स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।
यश के लुक और स्वैग ने मारी बाजी
‘टॉक्सिक’ में यश को एक बेहद अलग और स्टाइलिश अंदाज में पेश किया गया है। फिल्म में उनका गैंगस्टर अवतार, बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और एक्शन सीक्वेंस दर्शकों का ध्यान खींचते हैं। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में कई दर्शकों ने यश की एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ की है। उनके एंट्री सीन से लेकर एक्शन सीन्स तक पर थिएटर में फैंस का उत्साह देखने को मिला। कुछ दर्शकों को फिल्म में यश का अंदाज ‘KGF’ की याद भी दिलाता है, जबकि कुछ ने इसे उनकी पिछली फिल्मों से अलग बताने की कोशिश की है। यानी अगर आप यश के फैन हैं और उन्हें बड़े पर्दे पर एक्शन करते देखना पसंद करते हैं, तो फिल्म आपको कई जगह निराश नहीं करेगी।
कहानी सिर्फ गैंगस्टर और हिंसा तक सीमित नहीं
‘टॉक्सिक’ को केवल एक साधारण एक्शन फिल्म मानना शायद सही नहीं होगा। कहानी अपराध, ताकत और हिंसा की दुनिया के साथ-साथ परिवार, प्यार, रिश्ते, वफादारी और बदले जैसे पहलुओं को भी जोड़ती है। फिल्म की कहानी धीरे-धीरे अपने किरदारों की परतें खोलती है। शुरुआत में दर्शक एक अपराध की दुनिया में प्रवेश करता है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ कहानी का भावनात्मक हिस्सा भी सामने आता है। यश फिल्म में दो अलग-अलग किरदारों में नजर आते हैं। एक तरफ उनका किरदार राया अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है, वहीं दूसरे किरदार के जरिए यश का ज्यादा भावनात्मक पक्ष देखने को मिलता है। दोनों किरदारों की बॉडी लैंग्वेज और अंदाज में अंतर रखने की कोशिश की गई है, जिससे यश को एक ही फिल्म में अलग-अलग रंग दिखाने का मौका मिलता है।
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नयनतारा और कियारा ने भी छोड़ी छाप
फिल्म की फीमेल स्टार कास्ट भी कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नयनतारा अपने किरदार में भावनात्मक गहराई लेकर आती हैं और कई जगह एक्शन में भी प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं कियारा आडवाणी और यश की केमिस्ट्री को भी शुरुआती प्रतिक्रियाओं में पसंद किया गया है। हुमा कुरैशी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करती हैं। वहीं रुक्मिणी वसंत का किरदार भी कहानी में अलग रंग जोड़ता है। तारा सुतारिया समेत बाकी कलाकार भी फिल्म की दुनिया को बड़ा बनाने में योगदान देते हैं।
पहला हाफ धीरे-धीरे बनाता है माहौल
फिल्म का पहला हिस्सा कहानी, किरदारों और रिश्तों को स्थापित करने में समय लेता है। निर्देशक गीतू मोहनदास ने शुरुआत में कहानी को तेजी से दौड़ाने के बजाय धीरे-धीरे इसकी दुनिया तैयार करने की कोशिश की है। इसी वजह से कुछ दर्शकों को पहला हिस्सा थोड़ा धीमा लग सकता है। लेकिन इंटरवल के आसपास कहानी ज्यादा तेज होती है और फिल्म आगे के हिस्से के लिए बड़ा सेटअप तैयार करती है। पहले हाफ में एक्शन के साथ किरदारों के रिश्तों पर भी फोकस रखा गया है। इससे दर्शक कहानी के मुख्य किरदारों को समझने की कोशिश करता है।
सेकंड हाफ में बढ़ जाता है एक्शन और हिंसा का स्तर
इंटरवल के बाद ‘टॉक्सिक’ का अंदाज काफी बदल जाता है। एक्शन सीक्वेंस ज्यादा बड़े और हिंसक हो जाते हैं। फिल्म की विजुअल स्केल भी यहां ज्यादा साफ दिखाई देती है। शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं में फिल्म के एक्शन और विजुअल्स को काफी सराहना मिली है। हालांकि, कुछ दर्शकों ने हिंसा और फिल्म की लंबाई को लेकर आपत्ति भी जताई है। यानी फिल्म का सेकंड हाफ उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आ सकता है जिन्हें बड़े पर्दे पर हाई-ऑक्टेन एक्शन पसंद है।
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कहानी की रफ्तार बनी फिल्म की कमजोरी
जहां यश के अभिनय और एक्शन की तारीफ हो रही है, वहीं फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म की कहानी कई जगह उम्मीद के मुताबिक प्रभाव पैदा नहीं कर पाती। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कहानी की गति धीमी महसूस होती है। सोशल मीडिया पर कुछ प्रतिक्रियाओं में फिल्म की तुलना ‘KGF’ से भी की गई है। कुछ दर्शकों को लगा कि यश की स्क्रीन इमेज और फिल्म की शैली उन्हें उनकी पिछली ब्लॉकबस्टर की याद दिलाती है।
क्लाइमैक्स में आता है बड़ा ट्विस्ट
फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, कई राज सामने आते हैं। कहानी को सीधे तरीके से खत्म करने के बजाय क्लाइमैक्स में एक बड़ा मोड़ देने की कोशिश की गई है। यह ट्विस्ट फिल्म में पहले दिखाए गए कुछ घटनाक्रमों को अलग नजरिए से देखने का मौका देता है। यही वजह है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी कुछ हिस्से दर्शकों के दिमाग में बने रह सकते हैं।
‘टॉक्सिक’ को मिला A सर्टिफिकेट
फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ‘A’ सर्टिफिकेट के साथ पास किया है। यानी इसे केवल 18 साल या उससे अधिक उम्र के दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकते हैं। फिल्म में हिंसा और वयस्क विषयों के कारण पहले से ही चर्चा थी। रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म को बड़े कट्स के बिना रिलीज की मंजूरी मिली।
रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त माहौल
‘टॉक्सिक’ ने रिलीज से पहले ही एडवांस बुकिंग में मजबूत शुरुआत की थी। 25 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फिल्म की डे-1 एडवांस बुकिंग ₹40 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी थी, जबकि कई बाजारों में बुकिंग अभी पूरी तरह खुली भी नहीं थी। कर्नाटक फिल्म का सबसे मजबूत बाजार बना हुआ था, जबकि हिंदी वर्जन ने भी अच्छी शुरुआत की। रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म के हजारों शो एडवांस में तेजी से भर रहे थे। रिलीज से पहले ही टिकट बिक्री और बुकिंग को देखते हुए ट्रेड में फिल्म के बड़े ओपनिंग डे की उम्मीद जताई जा रही थी।
यश की फिल्म या कहानी की कमी?
‘टॉक्सिक’ में यश का स्टारडम, शानदार स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन और विजुअल्स सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। वहीं फिल्म की कहानी की गति, एडिटिंग और लंबाई को लेकर कुछ दर्शकों ने सवाल उठाए हैं। अगर आपको बड़े पर्दे पर जबरदस्त एक्शन, गैंगस्टर वर्ल्ड और यश का स्टाइल पसंद है, तो ‘टॉक्सिक’ आपके लिए एक अच्छा सिनेमाई अनुभव हो सकती है। लेकिन अगर आप सबसे ज्यादा मजबूत और तेज कहानी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म के कुछ हिस्से आपको धीमे लग सकते हैं।




















