Naresh Bhagoria
4 Feb 2026
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर से एक इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया, जहां बेटों ने बीमा की रकम हासिल करने के लिए अपने ही पिता की हत्या की साजिश रची। यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था, बल्कि महीनों तक प्लान की गई एक ठंडी और खौफनाक रणनीति थी।
56 वर्षीय ई.पी. गणेशन की मौत को शुरुआत में आकस्मिक बताया गया। परिवार का दावा था कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। पुलिस ने भी शुरुआती तौर पर इसी आधार पर मामला दर्ज किया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। बीमा कंपनी को मौत की परिस्थितियां असामान्य लगीं। डाटा में मिसमैच था, टाइमलाइन में गैप था। यहीं से केस ने यू-टर्न लिया और सच्चाई की परतें खुलने लगीं।
जांच में सामने आया कि गणेशन के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपए का बीमा कराया गया था, जिसके लाभार्थी उनके बेटे थे। यही रकम इस पूरे अपराध की ड्राइविंग फोर्स बनी। पुलिस के मुताबिक, बेटों ने पहले भी कई बार अपने पिता की हत्या की कोशिश की थी। यह बार-बार की गई सोची-समझी कोशिशों की सीरीज थी।
इस केस को सबसे ज्यादा शॉकिंग बनाता है हत्या का तरीका। आरोपियों ने प्राकृतिक हादसे का नैरेटिव सेट करने के लिए सांप का इस्तेमाल किया। जांच में खुलासा हुआ कि घटना वाले दिन सुबह-सुबह एक विषैला करैत सांप घर लाया गया। जानबूझकर गणेशन की गर्दन पर उससे कटवाया गया, ताकि मौत को सर्पदंश जैसा दिखाया जा सके।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह पहली कोशिश नहीं थी। मौत से करीब एक हफ्ते पहले भी आरोपियों ने एक कोबरा का इंतजाम किया था और गणेशन के पैर में उससे कटवाया गया था। हालांकि उस वक्त किस्मत ने साथ दिया और सांप का जहर जानलेवा साबित नहीं हुआ।
अगर बीमा कंपनी ने शक न जताया होता, तो यह हत्या शायद हमेशा एक आकस्मिक मौत बनकर फाइलों में दफन हो जाती। कंपनी ने मौत के पैटर्न, मेडिकल रिपोर्ट और क्लेम डिटेल्स में गड़बड़ी देखी और पुलिस को अलर्ट किया। इसके बाद दोबारा जांच शुरू हुई, कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले गए, और आरोपियों की कहानी बिखरती चली गई।
तिरुवल्लूर के पुलिस अधीक्षक विवेकानंद शुक्ला के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हो गया कि गणेशन की मौत एक सोची-समझी हत्या थी। सांप से कटवाना सिर्फ एक कवर स्टोरी थी। असल में यह लालच, धोखे और रिश्तों के कत्ल की कहानी है। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।