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नई सरकार की तैयारी पूरी :मणिपुर में एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटा, अधिसूचना जारी

मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की है।
मणिपुर में एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटा, अधिसूचना जारी
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। मणिपुर में करीब एक वर्ष तक चले राष्ट्रपति शासन के बाद अब राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति शासन हटाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 356(2) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए 13 फरवरी 2025 को लागू की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से समाप्त किया जा रहा है। इस निर्णय से मणिपुर में नई सरकार के गठन और राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद फिर से जागी है।

    13 फरवरी 2025 को लगाया गया था राष्ट्रपति शासन

    दरअसल, मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। यह कदम तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद उठाया गया था। उस समय राज्य गंभीर जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था। लगातार बढ़ते तनाव और प्रशासनिक संकट को देखते हुए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। अब राष्ट्रपति शासन हटने के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि नई सरकार राज्य में शांति, विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी।

    युमनाम खेमचंद लेंगे सीएम पद की शपथ

    भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ ही उनके मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए उन्हें राज्य की कमान सौंपे जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 

    नई सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां

    मणिपुर की नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विश्वास बहाली होगी। विस्थापित लोगों का पुनर्वास और सामाजिक समरसता स्थापित करना अहम होगा। कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और सुरक्षा बलों तथा स्थानीय समुदायों के बीच तालमेल बनाना जरूरी रहेगा। साथ ही राज्य की आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और बुनियादी ढांचे को सुधारना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। सीमावर्ती राज्य होने के कारण अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण, प्रशासनिक पारदर्शिता और सभी समुदायों को साथ लेकर विकास करना नई सरकार की परीक्षा साबित होगा। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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