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प्रदर्शनकारियों पर SC सख्त!आपराधिक बैकग्राउंड वालों को नहीं मिलेगी राहत, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने कहा गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को राहत नहीं मिलेगी।
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आपराधिक बैकग्राउंड वालों को नहीं मिलेगी राहत, जानिए कोर्ट ने क्या कहा
प्रदर्शनकारियों पर SC सख्त!

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि राज्य सरकारें कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए एफआईआर वापस लेने या बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पहले के आदेश में जांच जारी रखने की बात कहने का मतलब यह नहीं है कि सरकारें मुकदमे वापस नहीं ले सकतीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी।

SC ने अपने पुराने आदेश पर दूर किया भ्रम

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह स्पष्टीकरण उस समय दिया, जब याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार मामलों को वापस लेने का आश्वासन दे चुकी है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इसके बावजूद कुछ राज्यों के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देकर जांच जारी रखने की बात कह रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि उसने एफआईआर वापस लेने या मुकदमा खत्म करने पर कोई रोक नहीं लगाई है। राज्य सरकारें नियमों के अनुसार इस पर फैसला ले सकती हैं।

गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को नहीं मिलेगी राहत

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों को राहत देने के पक्ष में है लेकिन प्रदर्शन की आड़ में शामिल आपराधिक तत्वों को किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ऐसे 2,738 लोगों की पहचान की गई है जिन पर हत्या, रेप और डकैती जैसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं। आरोप है कि ये लोग हिंसा और उपद्रव फैलाने के उद्देश्य से प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

छोटे मामलों में छात्रों को परेशान नहीं किया जाए

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि वे किसी भी अपराधी को बचाने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर अपराधियों की पहचान के नाम पर उन छात्रों या लोगों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए जिनके खिलाफ मामूली धाराओं में या राजनीतिक आंदोलन से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं।

छात्रों की आड़ में छिपे अपराधी राहत के हकदार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि छात्रों की आड़ में छिपे अपराधी किसी राहत के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि के आधार पर कार्रवाई का दायरा केवल गंभीर और जघन्य अपराधों तक सीमित रहेगा। मामूली मामलों में आरोपी छात्रों को इसके दायरे में नहीं रखा जाएगा।

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पुलिस की कार्रवाई पर भी कोर्ट की सख्ती

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने बिना वर्दी के बल प्रयोग किया। उन्होंने इस मामले में सरकार से जवाब मांगे जाने की बात कही। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर किसी पुलिस अधिकारी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसे किसी भी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिसकर्मियों पर हमले का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामले की सुनवाई एकतरफा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों पर हमले हुए उन्हें गंभीर चोटें आईं और महिला पुलिस अधिकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। कोर्ट ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। इसके लिए गठित होने वाली कमिटी हर पक्ष की बात सुनेगी।

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18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की है। उस दिन कोर्ट स्वतंत्र कमिटी के गठन और उसके कामकाज के दायरे पर विचार करेगा। इस कमिटी की अध्यक्षता किसी पूर्व जज को सौंपी जा सकती है। कोर्ट प्रदर्शन और आंदोलनों के दौरान कार्रवाई को लेकर एक उचित प्रोटोकॉल तैयार करने पर भी विचार करेगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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