इटारसी नगर पालिका के पथरौटा डंप साइट पर कचरा जलाने और दबाने पर NGT सख्त

भोपाल। इटारसी के पथरौटा स्थित पुराने कचरा डंप साइट पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने गंभीरता से लिया है। एनजीटी ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कलेक्टर नर्मदापुरम, इटारसी नगर पालिका के सीएमओ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
1.72 करोड़ रुपए में दिया था कॉन्ट्रेक्ट
मामला पथरोटा साइट पर वर्षों से जमा करीब 31,400 मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट के निपटान से जुड़ा है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत इटारसी नगर पालिका ने दिसंबर 2023 में इसके बायोमाइनिंग और निपटान का कार्य करीब 1.72 करोड़ रुपए की लागत से एसआर मैप टेक्नोलॉजीज, ग्वालियर को दिया था। कार्य चार महीने में पूरा किया जाना था। प्रक्रिया में कचरे की खुदाई, तौल, विंड्रो निर्माण, स्थिरीकरण, आरडीएफ की छंटाई और ट्रॉमेल स्क्रीनिंग शामिल थी।आवेदन में आरोप लगाया गया कि वैज्ञानिक बायोमाइनिंग के बजाय कचरे को खुले में जलाया और जमीन में दबाया गया। मई 2024 के निरीक्षण में विंड्रो और आरडीएफ से धुआं निकलता पाया गया था। निरीक्षण के बाद ट्रॉमेल मशीन लगाने के निर्देश दिए गए, लेकिन जून 2024 तक मशीन स्थापित नहीं होने की बात भी सामने आई।
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इटारसी नगर पालिका को सख्त निर्देश
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने बताया कि एनजीटी ने इटारसी नगर पालिका को सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और लीचेट को मिट्टी, भूजल, कृषि भूमि या जलस्रोतों में जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। लीचेट के संग्रह, नियंत्रण और उपचार की व्यवस्था के साथ मिट्टी, सतही जल और भूजल की वैज्ञानिक जांच भी कराने को कहा है। खुले में कचरा जलाने, डंप करने या दबाने पर रोक लगाई गई है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को होगी।
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