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संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का राज क्या? पोस्टमार्टम और परिवार के आरोपों से बढ़ी उलझन

वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य बताए जा रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला उलझता जा रहा है। CCTV में चौथी मंजिल से गिरने की घटना सामने आई, जबकि पोस्टमार्टम और कमरे से मिले साक्ष्यों ने कई सवाल खड़े किए। परिवार ने CBI और संत समाज ने SIT जांच की मांग की है।
संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत का राज क्या? पोस्टमार्टम और परिवार के आरोपों से बढ़ी उलझन
संत प्रेमानंद के शिष्य की मौत बनी मिस्ट्री!

मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े बताए जा रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला अब भी कई सवालों में उलझा है। 25 सितंबर की सुबह गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। पुलिस की शुरुआती जांच और CCTV फुटेज के आधार पर मामला आत्महत्या का माना जा रहा है। हालांकि, परिवार के आरोपों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कमरे से मिले साक्ष्यों के बाद परिजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

कैसे हुई रसिक दुलारी शरण की मौत?

पुलिस के मुताबिक, 25 सितंबर की सुबह करीब 10:25 बजे दीपक अपने कमरे से बाहर निकलते हुए CCTV में दिखाई दिए। इसके बाद वह अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की छत तक पहुंचे। पुलिस के अनुसार, करीब 10:36 बजे वह छत से नीचे गिर गए। गंभीर हालत में उन्हें आश्रम से जुड़े लोग अस्पताल लेकर पहुंचे। उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस अब कमरे से लेकर छत और फिर अस्पताल तक के घटनाक्रम को CCTV फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है।

कमरे से मिला इलेक्ट्रिक ग्राइंडर

जांच के दौरान दीपक के कमरे से इलेक्ट्रिक टाइल्स ग्राइंडर यानी कटिंग मशीन मिलने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उनके शरीर के निजी हिस्से में गंभीर चोट के तथ्य भी सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि छत से गिरने से पहले दीपक ने खुद को ग्राइंडर से चोट पहुंचाई थी। हालांकि, पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि चोट किस परिस्थिति में लगी और इसके पीछे क्या वजह थी। पुलिस का कहना है कि इस सवाल का जवाब फॉरेंसिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत, चौथी मंजिल से कूदकर दी जान, पुलिस जांच में जुटी

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह ज्यादा खून बहने से हुआ शॉक बताई गई है। रिपोर्ट में सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटों का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, सिर पर गंभीर चोट थी, जिस पर टांके लगाए गए थे। निचले होंठ और ठुड्डी पर भी चोट के निशान बताए गए हैं। टखने में फ्रैक्चर और शरीर के निजी हिस्से में भी गंभीर चोट दर्ज की गई है। आंतरिक जांच में खोपड़ी के पीछे फ्रैक्चर और खून का थक्का मिलने की बात सामने आई। छाती की कई पसलियां टूटी थीं और बाएं फेफड़े में भी चोट पाई गई। पुलिस इन सभी चोटों को घटना के पूरे क्रम के साथ जोड़कर जांच कर रही है।

परिवार को कब मिली घटना की जानकारी?

दीपक के परिवार के मुताबिक, उन्हें फोन पर बताया गया था कि वह गिर गए हैं और उनकी हालत गंभीर है। परिवार को यह भी बताया गया कि अस्पताल में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद जबलपुर से परिवार के लोग वृंदावन के लिए रवाना हुए। परिजनों का कहना है कि वे रात करीब 3 बजे आश्रम पहुंचे, लेकिन उन्हें दीपक की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। परिवार का दावा है कि उन्हें बाहर बैठकर इंतजार करने के लिए कहा गया और सुबह तक उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई। परिजनों ने इस देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।

परिवार ने उठाए कई सवाल

परिजनों के मुताबिक, दीपक वर्ष 2024 से वृंदावन में रह रहे थे। शुरुआती दौर में परिवार उनसे मिल पाता था, लेकिन बाद में मुलाकात और बातचीत कम होती गई। दीपक के जीजा सोनू पटेल के मुताबिक, परिवार ने उनसे संपर्क बनाए रखने की कई कोशिशें कीं। परिजनों का दावा है कि वे कई बार वृंदावन आए, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। परिवार का कहना है कि पहले दीपक सामान्य रूप से बातचीत करते थे, लेकिन बाद में उनका संपर्क काफी सीमित हो गया। इन आरोपों पर आश्रम की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।

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परिवार को आत्महत्या की आशंका क्यों नहीं थी?

परिजनों का कहना है कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि दीपक आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं। परिवार के मुताबिक, उन्होंने कभी ऐसी बात नहीं कही थी जिससे इस तरह की आशंका होती। परिवार ने यह भी दावा किया है कि दीपक कुछ लोगों से ऐसी बातें करते थे, जिनसे उन्हें लगता था कि उनके साथ कुछ गलत हुआ है। हालांकि, परिवार के पास यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि दीपक किस घटना या परेशानी की बात कर रहे थे। अब परिजन उनकी मोबाइल चैट, डायरी और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग कर रहे हैं।

आश्रम की भूमिका पर भी सवाल

परिवार ने घटना की जानकारी मिलने के बाद आश्रम में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि आश्रम की ओर से कोई व्यक्ति घटना के बारे में जानकारी देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। परिवार का यह भी दावा है कि दीपक की मौत के बाद आश्रम की ओर से उनसे मिलने या संवेदना जताने कोई व्यक्ति नहीं आया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है और आश्रम का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं है। इसलिए इन्हें फिलहाल परिवार के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

कौन थे रसिक दुलारी शरण?

रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी था। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। परिवार के मुताबिक, नर्मदा परिक्रमा के बाद वह वृंदावन पहुंचे और संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम में रहने लगे। परिवार के अनुसार, वर्ष 2024 से वह वृंदावन में रह रहे थे। उन्हें संत प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि वृंदावन में रहने के बाद धीरे-धीरे दीपक का परिवार से संपर्क कम होता गया।

CCTV और मोबाइल की जांच

पुलिस का कहना है कि शुरुआती CCTV फुटेज में दीपक के चौथी मंजिल की छत से गिरने की घटना दिखाई देती है। पुलिस फिलहाल इसे आत्महत्या के एंगल से जांच रही है, लेकिन परिवार की शिकायत के बाद दूसरे पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस ने अपार्टमेंट का DVR, मोबाइल फोन, खून के सैंपल और अन्य साक्ष्य फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। मोबाइल फोन में मौजूद चैट, फोटो और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। पुलिस ने डायरी और दूसरे सामान को भी जांच में शामिल किया है।

संत समाज ने भी मांगी उच्च स्तरीय जांच

दीपक की मौत के बाद वृंदावन के साधु-संतों की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में धर्म रक्षा संघ के बैनर तले साधु-संतों की बैठक हुई। बैठक में मांग की गई कि यह स्पष्ट किया जाए कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है। महंत मोहिनी शरण महाराज ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच नहीं होने पर संत समाज आंदोलन कर सकता है। बैठक में अन्य संतों की ओर से भी घटना को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

अब SIT और CBI जांच की मांग

मामले में अब उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। परिवार की ओर से CBI जांच की मांग की गई है। वहीं, संत समाज की ओर से SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की जा रही है। परिजनों का कहना है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। पुलिस फिलहाल आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन साथ ही दूसरे संभावित पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच में किन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस?

इस मामले में जांच के कई अहम बिंदु हैं। सबसे पहला सवाल है कि दीपक के कमरे में घटना से पहले क्या हुआ था। दूसरा, उनके शरीर पर गंभीर चोटें किस परिस्थिति में लगीं। तीसरा, कमरे से निकलने के बाद चौथी मंजिल की छत तक पहुंचने के बीच क्या हुआ। इसके अलावा पुलिस मोबाइल चैट, डायरी, CCTV फुटेज, DVR, फोरेंसिक रिपोर्ट और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। परिवार की ओर से आश्रम में जानकारी मिलने में देरी और दीपक से मुलाकात नहीं होने को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच की मांग की गई है। फिलहाल पुलिस का शुरुआती निष्कर्ष आत्महत्या की ओर है, लेकिन मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और पुलिस की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 25 सितंबर की सुबह दीपक लोधी के साथ वास्तव में क्या हुआ था।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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