सिवनी मालवा: बीजेपी पार्षदों ने सीएमओ को सौंपा ज्ञापन: मांगों के लिए दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

सिवनी मालवा। ज्ञापन में भाजपा पार्षदों ने कहा कि नगर की जनता पिछले करीब चार वर्षों से विभिन्न कार्यों को लेकर परेशान है और छोटे-छोटे कार्यों के लिए हितग्राहियों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सफाई, नामांतरण, NOC, कचरा उठाने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल प्रदाय, कर्मचारियों की उपस्थिति और आवारा मवेशियों सहित 14 मांगें रखी गई हैं। वहीं, ज्ञापन के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन समस्याओं को पार्षद चार साल पुराना बता रहे हैं, उन पर आवाज अब क्यों उठाई गई। अब सभी की नजर 10 दिन में होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
चार साल से जनता परेशान होने का दावा
भाजपा पार्षदों के ज्ञापन में कहा गया है कि नगर की जनता पिछले करीब चार वर्षों से विभिन्न कार्यों को लेकर परेशान है। छोटे-छोटे कार्यों के लिए हितग्राहियों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और पूर्व में कार्य कराने के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। ऐसे में सवाल नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली के साथ नगर की समस्याओं को लेकर अब तक पार्षदों की भूमिका पर भी उठ रहा है।
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14 मांगें, लेकिन सवाल अब उठाने को लेकर
ज्ञापन में सफाई व्यवस्था से लेकर नामांतरण, NOC, कचरा उठाने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल प्रदाय, कर्मचारियों की उपस्थिति और आवारा मवेशियों तक की समस्याओं को शामिल किया गया है। पार्षदों ने नामांतरण के लिए अधिकतम 45 दिन और NOC के लिए तीन दिन जैसी समयसीमा तय करने की मांग रखी है। साथ ही प्रत्येक वार्ड में सफाई व्यवस्था सुधारने और नियमित कचरा उठाने की मांग भी की गई है।
जनता की आवाज या चुनावी समय की दस्तक?
राजनीतिक तौर पर नगर की समस्याओं पर जनप्रतिनिधियों का सक्रिय होना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन समय और परिस्थितियां सवाल जरूर खड़े करती हैं। चार साल तक समस्याओं के बने रहने का दावा और अब 14 सूत्रीय मांगों के साथ आंदोलन की चेतावनी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश है या आने वाले नगरीय चुनावों से पहले राजनीतिक सक्रियता बढ़ने का संकेत है। इसका जवाब भाजपा पार्षद ही बेहतर दे सकते हैं।
10 दिन बाद होगी असली परीक्षा
ज्ञापन में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो पहले मुख्य नगर पालिका अधिकारी का घेराव और उसके बाद गांधी चौक पर धरना दिया जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या 10 दिनों में चार साल पुरानी समस्याओं का समाधान शुरू हो पाएगा या फिर ज्ञापन, अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी शहर की राजनीति में एक और औपचारिकता बनकर रह जाएगी। आने वाले 10 दिन सिवनी मालवा की नगर राजनीति और प्रशासन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
सफाई से लेकर जल प्रदाय और आवारा मवेशियों तक मांगें
भाजपा पार्षदों ने प्रत्येक वार्ड में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और विशेष सफाई अभियान चलाने, नामांतरण प्रकरणों के निराकरण के लिए अधिकतम 45 दिन की समयसीमा तय करने और अनापत्ति प्रमाण पत्र तीन दिन में जारी करने की मांग की है। फूल-पत्ती एकत्रीकरण के लिए ऑटो शुरू करने, प्रत्येक वार्ड में प्रतिदिन कचरा ऑटो की व्यवस्था और हेल्पर द्वारा कचरा डस्टबिन से वाहन में डालने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा अवैध कॉलोनियों से ही भू-अंतरण शुल्क लिए जाने और नगर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की गई है।
कर्मचारियों की उपस्थिति और नवरात्रि सफाई पर भी जोर
ज्ञापन में कर्मचारियों को आम जनता से सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने, समग्र आईडी में नाम जोड़ने-काटने की समयसीमा तय करने, जल प्रदाय के लिए सुबह और शाम का समय निर्धारित करने तथा कर्मचारियों की निर्धारित समयावधि में कार्यालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की गई है। नवरात्रि पर्व पर सभी पंडालों में विशेष सफाई व्यवस्था तथा शहर में आवारा मवेशी, सांड, कुत्ते और सूअर जैसे पशुओं को नियंत्रित करने की मांग भी शामिल है। फिलहाल जनता की नजर प्रशासन की कार्रवाई के साथ उन पार्षदों पर भी रहेगी, जिन्होंने इन समस्याओं को लेकर मोर्चा खोला है।




















