चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI को शामिल करने का मामला, सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की राय अलग

नई दिल्ली। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में अलग-अलग राय रखी। सुप्रीम कोर्ट की 23 सितंबर की सूची में दोनों न्यायाधीशों की पीठ के सामने दोपहर 2 बजे की सुनवाई दर्ज है।
जस्टिस दत्ता का 5 जजों की बेंच को मामला भेजने से इनकार
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजने की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने से जुड़े तर्कों पर भी अपनी राय रखी। जस्टिस दत्ता ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉलेजियम व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि जज खुद ही जजों की नियुक्ति करते हैं। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों से जानकारी ली जाती है और खुफिया रिपोर्टों पर भी विचार किया जाता है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि एक-दो नियुक्तियों को लेकर विवाद होने के आधार पर पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
चयन समिति में सरकार के प्रतिनिधि को लेकर दलील में वजन
जस्टिस दत्ता ने कहा कि अदालत के सामने यह दलील भी रखी गई है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयुक्तों का निष्पक्ष चयन जरूरी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री के साथ सरकार की ओर से नामित प्रतिनिधि के चयन समिति में शामिल होने से प्रक्रिया सरकार की ओर झुक सकती है। इसके अलावा तीन सदस्यीय समिति में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका प्रभावी न रहकर केवल औपचारिक बन सकती है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि उन्हें इस दलील में कुछ वजन नजर आता है।
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जस्टिस शर्मा ने दत्ता के फैसले से असहमति जताई
इसके बाद जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने अपना आदेश पढ़ना शुरू किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस दत्ता के प्रति पूरे सम्मान के साथ वह उनके निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं। जस्टिस शर्मा ने कहा कि पिछली बार जब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी व्यवस्था पर फैसला दिया था, तब उसका उद्देश्य एक खाली जगह को भरना था। उस समय नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर संसद की ओर से कोई स्पष्ट कानून नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था सुझाई थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं क्योंकि संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कानून बना चुकी है।
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मामला 5 जजों की बेंच के सामने भेजने की राय
जस्टिस शर्मा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनका मत है कि मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाना चाहिए और वह पांच जजों की बेंच का गठन करें। इस तरह पीठ के दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के कारण मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पांच सदस्यीय पीठ के गठन के सवाल से जुड़ गई है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चुनौती मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 से भी जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की यही पीठ इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।




















