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कॉलोनी में पार्क के लिए आरक्षित जमीन का मामला, हाईकोर्ट ने कहा- डेवलपर को न मुआवजा मिलेगा, न मालिकाना हक

एक अहम फैसले में एमपी हाईकोर्ट ने कहा है कि कॉलोनी में पार्क के लिए आरक्षित जमीन पर डेवलपर को न मुआवजा मिलेगा और न ही मालिकाना हक। इटारसी के बिल्डर राकेश चतुर्वेदी की दो रिट अपीलें खारिज करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।
कॉलोनी में पार्क के लिए आरक्षित जमीन का मामला, हाईकोर्ट ने कहा- डेवलपर को न मुआवजा मिलेगा, न मालिकाना हक
कॉलोनी में पार्क के लिए आरक्षित जमीन का मामला

जबलपुर। मामला इटारसी के मेहरागांव की 39 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा था, जिसमें नियमों के तहत 8,550 वर्गफीट जमीन बगीचे के लिए खुली छोड़नी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि लेआउट मंजूर करवाकर व्यावसायिक लाभ लेने वाला व्यक्ति सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन छोड़ने जैसी शर्तों से मुकर नहीं सकता।

39 हजार वर्गफीट जमीन पर बनाई थी कॉलोनी

हाईकोर्ट में ये अपीलें राकेश चतुर्वेदी की ओर से दायर की गई थीं। मामला इटारसी के मेहरागांव में स्थित 39 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा था, जिस पर याचिकाकर्ता ने कॉलोनी विकसित की थी और नियमों के तहत 8,550 वर्गफीट जमीन बगीचे के लिए खुली छोड़नी थी।

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आरक्षित जमीन के हिस्से में बना प्राथमिक स्कूल

आरक्षित जमीन के एक हिस्से पर बाद में प्राथमिक विद्यालय का भवन बना दिया गया, जो उसी कॉलोनी के बच्चों के लिए सार्वजनिक उपयोग के वास्ते था। बाकी जमीन आज भी खुली पड़ी है। जमीन मालिक हरि प्रसाद चतुर्वेदी के पुत्र राकेश चतुर्वेदी ने जमीन का मुआवजा और अपने नाम म्यूटेशन करवाने के लिए याचिकाएं दायर की थीं।

एकलपीठ के फैसले के खिलाफ दायर की थी अपील

राकेश चतुर्वेदी की ओर से दायर याचिकाएं एकलपीठ द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी थीं। इसके बाद उन्होंने इसके खिलाफ दो रिट अपीलें डिवीजन बेंच में दायर कीं। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

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लेआउट की शर्तों से नहीं मुकर सकता डेवलपर

डिवीजन बेंच ने कहा कि जो व्यक्ति लेआउट मंजूर करवाकर व्यावसायिक लाभ उठाता है, वह उस पर लगी शर्तों से मुकर नहीं सकता। सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन छोड़ना भी इसी तरह की शर्त है। कॉलोनी में स्कूल या पार्क जैसी जनहित सुविधाएं नियमों के दायरे में आती हैं।

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ठोस कानूनी प्रावधान के बिना नहीं मांग सकते निजी हक

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल या पार्क जैसी जनहित सुविधाओं के लिए छोड़ी गई जमीन पर बिना किसी ठोस कानूनी प्रावधान के मुआवजा या निजी हक नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के साथ राकेश चतुर्वेदी की जमीन के मुआवजे और अपने नाम म्यूटेशन की मांग वाली अपीलों का भी निराकरण हो गया।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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