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श्रीलंका से इंदौर पहुंची 9 साल की DOGI !मोतियाबिंद के इलाज के लिए लाया,6 गुना सस्ता पड़ा इलाज

श्रीलंका में विशेषज्ञ नहीं मिला तो भारत आई एनी, इंदौर में हुआ सफल ऑपरेशन; अमेरिका से छह गुना तक सस्ता इलाज, 10-15 दिन यहीं रहेगी डॉगी
श्रीलंका से इंदौर पहुंची 9 साल की  DOGI !मोतियाबिंद के इलाज के लिए लाया,6 गुना सस्ता पड़ा इलाज

इंदौर। मेडिकल टूरिज्म की पहचान अब सिर्फ इंसानों के इलाज तक सीमित नहीं रह गई है। इसका एक अनोखा उदाहरण इंदौर में देखने को मिला, जहां श्रीलंका की 9 साल की फीमेल यॉर्कशायर टेरियर डॉग ‘एनी’ अपनी आंखों का इलाज कराने हजारों किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर पहुंची। एनी की आंख में मोतियाबिंद के कारण नजर कमजोर हो गई थी। शुक्रवार को इंदौर में उसकी कैटरैक्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।

एनी की आंख के लेंस में सफेदी आने के कारण उसे साफ दिखाई देना मुश्किल हो रहा था। उम्र बढ़ने के साथ उसकी आंख की समस्या बढ़ती गई। श्रीलंका में पालतू जानवरों की कैटरैक्ट सर्जरी के विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी मालकिन ने भारत में इलाज कराने का फैसला किया। इसके बाद एनी को जरूरी प्रक्रिया पूरी कर भारत लाया गया।

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अमेरिका की नागरिक मालकिन एनी को लेकर पहुंचीं इंदौर

एनी की मालकिन बेथनी एन हॉपकिंस अमेरिका की नागरिक हैं और फिलहाल श्रीलंका में रहती हैं। एनी की आंखों की समस्या का बेहतर इलाज कराने के लिए उन्होंने भारत का रुख किया। एनी को पहले श्रीलंका से फ्लाइट के जरिए चेन्नई लाया गया और इसके बाद चेन्नई से उसे इंदौर पहुंचाया गया।इस पूरी यात्रा के दौरान एनी को विशेष देखभाल में रखा गया। लंबी यात्रा के बावजूद उसे इलाज के लिए इंदौर लाया गया, क्योंकि यहां पालतू जानवरों की आंखों की सर्जरी के लिए विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध है।

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श्रीलंका में विशेषज्ञ नहीं मिले तो भारत का रुख

वेटरनरी सर्जन एवं आई सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र चौहान ने बताया कि श्रीलंका में पेट्स की कैटरैक्ट सर्जरी के विशेषज्ञ नहीं होने के कारण एनी को इंदौर लाया गया। डॉक्टर के अनुसार यह भारत में सामने आया एक अनोखा मामला है, जिसमें विदेशी पालतू जानवर को आंख की सर्जरी के लिए भारत लाया गया।उन्होंने बताया कि पालतू जानवरों में भी उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद की समस्या हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर उनकी दृष्टि काफी प्रभावित हो सकती है। एनी के मामले में भी लेंस में सफेदी आने के कारण उसकी देखने की क्षमता कमजोर हो गई थी।

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अमेरिका की तुलना में करीब छह गुना कम खर्च

एनी को भारत लाने के पीछे सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता ही कारण नहीं रही, बल्कि इलाज का खर्च भी एक महत्वपूर्ण वजह रहा। डॉ. चौहान के मुताबिक, भारत में पेट की कैटरैक्ट सर्जरी का खर्च करीब 1 लाख रुपए आता है। वहीं अमेरिका में इसी तरह की सर्जरी का खर्च करीब 6 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।यानी अमेरिका की तुलना में भारत में यह इलाज करीब छह गुना तक सस्ता पड़ सकता है। इसके अलावा यात्रा का समय भी कम है। श्रीलंका से अमेरिका पहुंचने में करीब 24 घंटे का समय लग सकता है, जबकि भारत पहुंचने में लगभग 3 से 4 घंटे लगते हैं। ऐसे में एनी के लिए भारत इलाज और यात्रा दोनों लिहाज से बेहतर विकल्प साबित हुआ।

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विदेशी पेट को भारत लाने के लिए लेनी पड़ती है अनुमति

विदेश से किसी पालतू जानवर को इलाज के लिए भारत लाना सामान्य यात्रा की तरह आसान नहीं है। इसके लिए संबंधित सरकारी अनुमति और कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।पालतू जानवर की बीमारी, प्रस्तावित इलाज, इलाज करने वाले डॉक्टर और संबंधित सेंटर समेत आवश्यक दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। सरकारी अनुमति मिलने के बाद ही विदेशी पेट को भारत लाया जा सकता है। इस प्रक्रिया की जटिलता के कारण विदेश से इलाज के लिए पालतू जानवरों के भारत आने के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।

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आंख में लगाया गया नया लेंस

एनी की कैटरैक्ट सर्जरी के दौरान उसकी आंख में नया इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) लगाया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी के बाद नए लेंस को आंख में पूरी तरह एडजस्ट होने में करीब 2 से 3 दिन लग सकते हैं।आमतौर पर ऑपरेशन के बाद 2 से 4 दिन में नजर में सुधार आना शुरू हो जाता है। हालांकि एनी की रिकवरी पर लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि किसी तरह की जटिलता सामने आने पर तत्काल उपचार किया जा सके।

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10 से 15 दिन इंदौर में रहेगी एनी

ऑपरेशन के तुरंत बाद एनी को वापस श्रीलंका नहीं ले जाया जाएगा। सर्जरी के बाद उसकी आंख की स्थिति और नए लेंस के एडजस्टमेंट को देखने के लिए उसे करीब 10 से 15 दिन इंदौर में रखा जाएगा।इस दौरान डॉक्टर नियमित रूप से उसकी आंख की जांच करेंगे और यह देखा जाएगा कि ऑपरेशन के बाद उसकी नजर में कितना सुधार हो रहा है। पूरी तरह संतोषजनक रिकवरी होने के बाद एनी अपनी मालकिन के साथ वापस श्रीलंका लौटेगी।

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पेट मेडिकल टूरिज्म की नई मिसाल

इंदौर में हुआ एनी का इलाज सिर्फ एक पालतू जानवर की सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में तेजी से विकसित हो रही पालतू जानवरों की चिकित्सा सुविधाओं की ओर भी संकेत करता है। जिस तरह बेहतर और किफायती इलाज के लिए दूसरे देशों से लोग भारत आते हैं, उसी तरह अब विदेशी पालतू जानवरों के इलाज के लिए भी भारत का रुख किए जाने के मामले सामने आने लगे हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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