CGPSC पर ED-EOW का डबल एक्शन, एडिशनल कलेक्टर गिरफ्तार, 2003 भर्ती घोटाले में 15 अफसरों पर चार्जशीट की तैयारी

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC विवाद से जुड़ी जांच में बड़ी हलचल सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर- रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। विशेष कोर्ट ने उन्हें 6 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। वहीं दूसरी ओर, वर्ष 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के मामले में EOW-ACB भी कार्रवाई को अंतिम रूप देने में जुटी है। जांच एजेंसी इस मामले में करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ इसी महीने के अंत तक आरोप पत्र दाखिल कर सकती है।
CGPSC विवाद में बड़ा एक्शन
CGPSC से जुड़े मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 6 दिनों की ED रिमांड पर भेज दिया।
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WhatsApp चैट बना जांच का अहम आधार
ED की ओर से रिमांड के दौरान पूछताछ के लिए अदालत में जो आधार रखा गया, उसमें उत्कर्ष चंद्राकर के साथ कथित WhatsApp चैट का भी हवाला दिया गया है। अब ED रिमांड अवधि के दौरान चेतन बोरघारिया से पूरे मामले को लेकर गहन पूछताछ करेगी।
रिमांड में खुलेगा जांच का राज
छह दिन की रिमांड के दौरान ED अधिकारियों की पूछताछ का फोकस कथित संपर्क, बातचीत और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों पर रहने की संभावना है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका रही और उनके बीच किस तरह का संपर्क था।
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2003 PSC भर्ती मामले में भी बड़ा अपडेट
इधर CGPSC की वर्ष 2003 की राज्य सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पुराने मामले में EOW-ACB ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक चालान तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इस महीने के अंत तक न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया जा सकता है। हालांकि आरोप पत्र दाखिल करने से पहले सरकार से आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश किए जाने के संकेत हैं।
17 अपात्र चयन और 17 योग्य बाहर
EOW की प्रारंभिक जांच और मूल डाटा की दोबारा गणना के लिए किए गए ड्राई रन में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले। जांच के मुताबिक 17 अपात्र अभ्यर्थियों के चयन और 17 योग्य अभ्यर्थियों के चयन से बाहर होने की बात सामने आई। इसके अलावा 56 अभ्यर्थियों के पद और मेरिट क्रम में बदलाव मिलने का भी उल्लेख किया गया है।
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इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी सवाल
जांच में सामने आया कि 52 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जबकि इतने ही पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर नहीं मिलने की बात सामने आई। जांच एजेंसी को अभ्यर्थियों की प्रोफाइल शीट में भी कथित छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं।
1290 अंक फिर भी चयन नहीं
मामले में वर्षा डोंगरे का प्रकरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के मुताबिक उन्हें 1290.41 अंक मिलने के बावजूद चयन नहीं हुआ। उनकी प्रोफाइल शीट में आबकारी उप निरीक्षक पद के सामने की गई काट-छांट की फोरेंसिक जांच में कथित तौर पर उनकी लिखावट और स्याही का मिलान नहीं होने का उल्लेख किया गया है।
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स्केलिंग सिस्टम पर भी सवाल
जांच में मानव विज्ञान विषय से जुड़े अभ्यर्थियों के अंकों में भी कथित विसंगति सामने आई। समान 200 वास्तविक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को स्केलिंग के बाद अलग-अलग अंक दिए जाने का आरोप है। एक अभ्यर्थी को 170.01 और दूसरे को 239.22 अंक मिलने का उल्लेख किया गया है। इससे पूरी स्केलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
आरक्षण में भी कथित गड़बड़ी
जांच में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी अनियमितता के आरोप सामने आए। एक अनारक्षित अभ्यर्थी को कथित तौर पर ST कोटे में शामिल कर राज्य लेखा सेवा का पद दिए जाने का आरोप है।
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तीन अभ्यर्थियों ने शुरू की थी कानूनी लड़ाई
राज्य गठन के बाद हुई पहली PSC परीक्षा में 147 पदों पर चयन हुआ था। चयन प्रक्रिया को लेकर तीन अभ्यर्थियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी। इनमें कवर्धा की वर्षा डोंगरे, मुंगेली के चमन सिन्हा और राजनांदगांव के रविंद्र सिंह शामिल थे।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
जांच के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को उचित मानते हुए नई चयन सूची तैयार करने की सिफारिश की थी। इसके बाद वर्ष 2016 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई। इस दौरान मामले से जुड़े कई अधिकारियों को पदोन्नति मिली और कुछ अधिकारियों को IAS में अवार्ड किए जाने की बात भी सामने आई।
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अब जांच के अगले चरण पर नजर
EOW-ACB अब जांच से जुड़े दस्तावेज और अभियोजन की अनुमति संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर रही है। यदि प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो सितंबर के अंत तक 15 अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए जाने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर, चेतन बोरघारिया की छह दिन की ED रिमांड के चलते CGPSC से जुड़े मौजूदा मामले की जांच भी अगले कुछ दिनों में अहम मोड़ ले सकती है।




















