PU Special :जेन-जी ने तैयार किए 3.5 क्विंटल हल्दी से 21 फीट के ईको-फ्रेंडली गणेश, उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के गेट पर होंगे विराजित

इंदौर में गणेशोत्सव के लिए 21 फीट ऊंची अनूठी गणेश प्रतिमा हल्दी से तैयार की जा रही है। 3.5 क्विंटल हल्दी से बन रही इस प्रतिमा की लागत 3 लाख रुपए है। जेन-जी युवा ड्राय फ्रूट्स, नारियल के अवशेष और कौड़ियों जैसी प्राकृतिक सामग्री से भी ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
जेन-जी ने तैयार किए 3.5 क्विंटल हल्दी से 21 फीट के ईको-फ्रेंडली गणेश, उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के गेट पर होंगे विराजित
इंदौर में हल्दी से बनाई जा रही गणेश प्रतिमा।

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। गणेशोत्सव को लेकर शहर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जगह-जगह पंडाल सजने लगे हैं और गणेश प्रतिमाएं अंतिम रूप ले रही हैं। इस बार भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें सबसे खास है हल्दी से तैयार की जा रही 21 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा, जिसे जेन-जी के युवा मिलकर आकार दे रहे हैं। खास बात यह है कि जेन-जी केवल हल्दी ही नहीं, बल्कि ड्राय फ्रूट्स, नारियल के अवशेष और कौड़ियों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से भी गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इन प्रतिमाओं के जरिए परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

क्या है इस प्रतिमा की खासियत

  • खड़ी हल्दी :  3.5 क्विंटल
  • कीमत : 3 लाख रुपए
  • ऊंचाई : 21 फीट
  • कारिगर : 10
  • समय : 3 माह
  • स्थापित : महाकाल मंदिर के गेट नंबर-4

कैसे आया आइडिया

महाकाल इंटरनेशनल संस्था के ऋषभ बाबू यादव ने बताया भगवान गणेश को हरिद्र गणेश भी कहा जाता है, इसलिए इस बार प्रतिमा को हल्दी से सजाया गया है। पिछले साल हमने लौंग और इलायची से निर्मित गणेश प्रतिमा की स्थापना की थी. हर साल कुछ नया करने का प्रयास रहता है. यह प्रतिमा पूरी तरह इको-फ्रेंडली है। सनातन परंपरा के अनुसार भगवान को अर्पित की जाने वाली सामग्री का विसर्जन भी प्रतिमा के साथ ही किया जाता है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।

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कौड़ी और ड्रायफ्रूट से भी बनाई जा रही प्रतिमाएं

जेन-जी हल्दी के अलावा नारियल, कौड़ी और ड्रायफ्रूट से भी प्रतिमाएं बना रहे हैं। इनमें 11 किलो की करीब कौडि़या लगाई जाएगी। नारियल थीम में नारियल के छिलके, रेशे और अन्य अपशिष्ट सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

तीसरी पीढ़ी प्रतिमा निर्माण से जुड़ी

यह तीसरी पीढ़ी है, जो गणेश प्रतिमाओं के निर्माण से जुड़ी हुई है। प्रतिमाओं के निर्माण में गंगा, क्षिप्रा और कानपुर की मिट्टी का उपयोग कर पूरी तरह इको-फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जाती हैं। सामान्यतः तीन फीट से लेकर 15 फीट ऊंचाई तक की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, जबकि विशेष ऑर्डर मिलने पर इससे बड़ी प्रतिमाएं भी तैयार की जाती हैं।

अतुल पाल, मूर्तिकार

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इससे पहले लौंग और इलायची से प्रतिमाओं का श्रृंगार किया

हमें क्लाइंट ने ही हल्दी से बनाने को कहा था उनके कहने पर ही हम बना रहे हैं। इसके पहले इलायची और लौंग से गणेश प्रतिमाओं का श्रृंगार कर चुके हैं। इस बार पांच प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, जिनमें तीन प्रतिमाएं इंदौर और दो उज्जैन की हैं।

श्रुति पांचाल, (जेन-जी) मूर्ति डेकोरेटर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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