
केप टाउन। दुनिया के पहले खुले तौर पर समलैंगिक इमाम माने जाने वाले मोहसिन हेंड्रिक्स की शनिवार को दक्षिण अफ्रीका के गकेबरहा शहर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने उनकी कार को रास्ते में रोककर उन पर कई राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। इस हत्या के पीछे की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन LGBTQ समुदाय ने इसे हेट क्राइम करार देते हुए कड़ी निंदा की है।
कैसे हुई इमाम मोहसिन हेंड्रिक्स की हत्या
दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के अनुसार, शनिवार को बेथेल्सडार्प के पास मोहसिन हेंड्रिक्स अपने एक सहयोगी ड्राइवर के साथ कार से कहीं जा रहे थे। तभी दूसरी कार ने उनकी कार को ओवरटेक कर रास्ता ब्लॉक कर दिया। इसके बाद उस कार से दो नकाबपोश हथियारबंद लोग बाहर आए और उन्होंने हेंड्रिक्स की कार पर कई गोलियां चला दीं।
हमलावरों के भाग जाने के बाद उनके साथी ने देखा कि मोहसिन हेंड्रिक्स की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने कहा कि हत्या का मकसद अभी स्पष्ट नहीं हुआ है और मामले की जांच की जा रही है।
LGBTQ समुदाय की प्रतिक्रिया
LGBTQ संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मोहसिन हेंड्रिक्स की हत्या की कड़ी निंदा की है। इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांस और इंटरसेक्स एसोसिएशन (ILGA) की कार्यकारी निदेशक जूलिया एहर्ट ने इस हत्या को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हम मोहसिन हेंड्रिक्स की हत्या की खबर से सदमे में हैं। हमें डर है कि यह हत्या नफरत की वजह से की गई होगी।”
इसके अलावा, LGBTQ समुदाय के अन्य संगठनों ने भी इसे हेट क्राइम करार दिया और कहा कि पुलिस को जल्द से जल्द अपराधियों को पकड़कर इंसाफ दिलाना चाहिए।
कौन थे इमाम मोहसिन हेंड्रिक्स
मोहसिन हेंड्रिक्स दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में पैदा हुए थे। वह पारंपरिक रूप से इस्लामी शिक्षा प्राप्त करने के बाद इमाम बने। लेकिन 1996 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद को समलैंगिक घोषित किया।
उनके इस बयान से इस्लामी जगत में काफी विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद उन्होंने LGBTQ और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की वकालत शुरू की। उन्होंने ऐसे मुसलमानों के लिए एक मस्जिद स्थापित करने का फैसला किया, जो समाज में हाशिए पर धकेले गए थे।
अल-गुरबा मस्जिद की स्थापना
2011 में मोहसिन हेंड्रिक्स ने केप टाउन में अल-गुरबा नाम की मस्जिद की स्थापना की, जो समलैंगिकों और हाशिए पर खड़े मुसलमानों के लिए एक सुरक्षित स्थान के रूप में जानी जाती थी। मस्जिद के निर्माण को लेकर मोहसिन हेंड्रिक्स ने कहा था, “अब समय आ गया है कि हम अपनी खुद की इबादत की जगह बनाएं, जहां लोग बिना किसी भेदभाव के इबादत कर सकें।”
उनकी इस पहल की जहां LGBTQ समुदाय ने सराहना की, वहीं पारंपरिक मुस्लिम समाज में उनकी आलोचना भी हुई।
ये भी पढ़ें- भारत में जल्द शुरू होगी वर्टिकल टेक-ऑफ एयर एंबुलेंस सेवा, आईआईटी-मद्रास स्टार्टअप को 1 बिलियन डॉलर का करार
2 Comments