लातूर। कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक, वह लंबे समय से बीमार थे और लातूर स्थित अपने आवास पर ही उनका इलाज चल रहा था। Shivraj Patil का सियासी सफर बेहद प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर, केंद्रीय मंत्री जैसे कई अहम पद संभाले और मराठवाड़ा की राजनीति में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे शिवराज पाटिल ने लातूर स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। परिवार के अनुसार, वह उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से घर पर ही चिकित्सा चल रही थी। उनके निधन की खबर सामने आते ही लातूर और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की।
शिवराज पाटिल के घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग, ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंच रहे हैं। सभी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
शिवराज पाटिल का राजनीतिक करियर पांच दशकों से भी ज्यादा का रहा। उन्होंने 1967-69 में लातूर नगर पालिका के सदस्य के रूप में राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद 1972 और 1978 में वह लातूर ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
उनकी असली पहचान तब बनी जब वे 1980 के चुनाव में लातूर लोकसभा सीट से विजयी होकर संसद पहुंचे। इसके बाद वह लगातार सात बार इस सीट को जीतते रहे- 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999।
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शिवराज पाटिल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के विश्वस्त नेताओं में गिने जाते थे। 1980 के दशक में वह रक्षा राज्य मंत्री और बाद में कैबिनेट में कई अहम विभागों के मंत्री रहे। 1991 से 1996 तक वह लोकसभा के 10वें स्पीकर रहे। 2004 में यूपीए सरकार बनने पर उन्हें देश के गृहमंत्री की जिम्मेदारी मिली। उनकी छवि एक शांत, साधारण, लेकिन अनुशासित नेता की रही है।
2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान शिवराज पाटिल देश के गृह मंत्री थे। हमले के बाद सुरक्षा में हुई खामियों की वजह से उनकी काफी आलोचना हुई, जिसके बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। यह भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने वाला एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।
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शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को लातूर जिले के चाकुर में हुआ। पिता शिवराम पाटिल किसान थे, और परिवार साधारण आर्थिक स्थिति से आता था। उन्होंने लातूर में प्रारंभिक शिक्षा ली। उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस में स्नातक किया। मुंबई यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राजनीति में प्रवेश कर गए। सीधे साधे व्यक्तित्व और साफ छवि ने उन्हें राजनीति में तेजी से ऊंचाई तक पहुंचाया।
शिवराज पाटिल का मराठवाड़ा में जबरदस्त प्रभाव था। लातूर क्षेत्र में उनकी पकड़ इतनी मजबूत रही कि कई सालों तक वह हर चुनाव भारी अंतर से जीतते रहे। उनके निधन के बाद लातूर के लोगों ने उन्हें सरल, उपलब्ध और सज्जन नेता के रूप में याद किया।
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