Naresh Bhagoria
6 Feb 2026
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह को अवमानना का नोटिस दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कलेक्टर से पूछा है कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश के बाद भी उन्होंने 45 सौ छात्रों वाले स्कूल की बेदखली का आदेश कैसे पारित किया? अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट में यह मामला चिल्ड्रन्स एजुकेशन सोसायटी और नेहरू मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की ओर से दायर किया गया है। आवेदकों का कहना है कि उन्हें बुरहानपुर ताप्ती मिल द्वारा स्कूल के लिए जगह आवंटित की गई थी। बाद में इस कपड़ा मिल के बीमारू घोषित होने पर उसका राष्ट्रीयकरण हुआ और मिल केंद्र सरकार के अधीन हो गई। इस बीच कपड़ा मिल द्वारा दी गई जमीन पर स्कूल संचालित हो रहा था। प्रशासन द्वारा ताप्ती मिल के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2024 को रोक लगा दी थी। बावजूद इसके बुरहानपुर कलेक्टर ने 9 दिसंबर 2025 को स्कूल की बेदखली का आदेश पारित कर दिया। इस आदेश को चुनौती देकर यह याचिका दाखिल की गई।
मामले में हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार व अधिवक्ता चिरंजीव शर्मा ने दलीलें रखीं। उनका कहना था कि पूरी मिल अब केन्द्र सरकार के अधीन है, ऐसे में कलेक्टर द्वारा उसके (मिल के) द्वारा आवंटित जमीन पर बेदखली की कार्रवाई नहीं की जा सकती। पवार ने कहा कि स्कूल में अभी 4500 छात्र पढ़ रहे और वहां पर 250 टीचरों व कर्मचारियों का स्टाफ है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कलेक्टर द्वारा क्षेत्राधिकार न होने के बाद भी की गई कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने उन्हें अवमानना का नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
सतना जिले के मझगवां में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) में व्याप्त अनियमित्ताओं की जांच के आदेश हाईकोर्ट ने वहां के CMHO को दिए हैं। एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्र में बिना पैसे दिए इलाज ही नहीं होता। और भी कई अनियमित्ताएं याचिका में उजागर की गईं थीं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कार्रवाई के लिए CMHO को 6 सप्ताह का समय दिया है।
यह जनहित याचिका मझगवां के पिंडरा ब्लॉक में रहने वाले कृषक सुशील सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के नाम पर मरीजों से वसूली की जाती है। इतना ही नहीं, मरीजों को भोजन देने के लिए जिसको ठेका दिया गया, उसका रजिस्ट्रेशन सीमेन्ट, लोहा, गिट्टी सप्लायर के रूप में है। इस बारे में सतना कलेक्टर से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई थी।