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दिल्ली के जनकपुरी में मौत का गड्ढा :जल बोर्ड के खोदे गड्ढे में गिरने से बाइक सवार की मौत, लापरवाही या साजिश?

नोएडा में युवराज की मौत के बाद अब दिल्ली के कैलाशपुरी निवासी कमल की खुले गड्ढे में गिरने से जान चली गई। रोहिणी से घर लौटते वक्त कमल लापता हो गया था। परिजन पूरी रात थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हुई। सुबह सड़क के गड्ढे में उसका शव मिला, जल बोर्ड की लापरवाही और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जल बोर्ड के खोदे गड्ढे में गिरने से बाइक सवार की मौत, लापरवाही या साजिश?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सड़कों की बदहाली एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक खुले और गहरे गड्ढे में गिरने से बाइक सवार युवक कमल की दर्दनाक मौत हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कमल ने हेलमेट, राइडिंग जैकेट और दस्ताने पहने हुए थे, लेकिन फिर भी उसकी मौत हो गई। यह हादसा सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    कैसे हुआ हादसा?

    यह घटना सोमवार देर रात की बताई जा रही है। कमल, रोहिणी स्थित अपने ऑफिस से घर लौट रहा था। रास्ते में वह लगातार परिवार के संपर्क में था। रात करीब 11:53 बजे उसने आखिरी बार फोन पर बताया कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच चुका है और अधिकतम 15 मिनट में घर आ जाएगा। लेकिन तय समय बीत गया, फिर आधा घंटा, एक घंटा… और कमल घर नहीं पहुंचा। इसके बाद उसका फोन भी बंद हो गया।

    पूरी सेफ्टी के बावजूद नहीं बची जान

    हादसे की तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि, कमल की Apache RTR 200 बाइक एक गहरे गड्ढे में गिरी हुई थी और वह खुद भी उसी गड्ढे के अंदर था। सिर पर हेलमेट, शरीर पर राइडिंग जैकेट और हाथों में ग्लव्स यानि सेफ्टी में कोई कमी नहीं थी। इसके बावजूद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे साफ होता है कि, हादसे की वजह तेज रफ्तार नहीं, बल्कि खुला और असुरक्षित गड्ढा था।

    पूरी रात तलाश करता रहा परिवार

    कमल के घर न पहुंचने पर परिवार और दोस्तों ने पहले अपने स्तर पर तलाश शुरू की। संभावित रास्तों, चौराहों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजन जनकपुरी, विकासपुरी, सागरपुर, डाबड़ी, रोहिणी समेत 7 से ज्यादा थानों में पहुंचे।

    परिजनों का आरोप- दर्ज नहीं की गई शिकायत

    परिजनों का आरोप है कि कमल के लापता होने के बाद जब वे पुलिस के पास पहुंचे, तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया गया। परिवार का कहना है कि, उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि 24 घंटे पूरे होने के बाद ही शिकायत दर्ज की जाती है। परिजनों के मुताबिक, मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक होने के बावजूद पूरे इलाके में गंभीर और व्यापक सर्च ऑपरेशन नहीं चलाया गया। परिवार का मानना है कि, अगर पुलिस ने रात में ही पूरी गंभीरता से तलाश की होती, तो संभव है कि कमल की जान बचाई जा सकती थी।

    मोबाइल लोकेशन के बावजूद क्यों नहीं मिली मदद?

    परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने मोबाइल की लास्ट लोकेशन ट्रैक की थी, जो लगभग 200 मीटर के दायरे में एक पार्क के आसपास बताई गई। पुलिस के दो कर्मचारी मौके पर भेजे गए, लेकिन सीमित तलाशी के बाद यह कहकर कार्रवाई रोक दी गई कि रात में सर्च संभव नहीं है और सुबह देखा जाएगा।

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    कैसे हुआ खुलासा

    मंगलवार सुबह करीब 8 बजे एक स्थानीय नागरिक ने PCR कॉल कर सूचना दी कि, सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में बाइक और एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड की मदद से शव को बाहर निकाला गया। तब पता चला कि यह वही जगह है, जहां रात में मोबाइल लोकेशन बताई गई थी।

    खुला गड्ढा बना मौत का कारण

    मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां गड्ढे के आसपास किसी तरह की बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। सड़क पर कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया था, जिससे राहगीरों को पहले से खतरे का अंदाजा हो सके। इसके अलावा इलाके में पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग नहीं थी, जिससे रात के समय गड्ढा दिखाई ही नहीं देता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि, यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के निर्माण कार्य के तहत खोदा गया था, लेकिन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

    जल बोर्ड पर लापरवाही का आरोप

    मृतक के परिवार ने सीधे तौर पर दिल्ली जल बोर्ड को इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया है। परिवार का कहना है कि, अगर सड़क पर काम चल रहा था, तो...

    • सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?
    • गड्ढा खुला छोड़ना किसके आदेश पर हुआ?
    • लोगों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

    परिजनों ने यह आशंका भी जताई है कि, यह सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि किसी साजिश की भी संभावना हो सकती है।

    क्या है पुलिस का पक्ष?

    दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, रात के समय परिजनों के साथ मिलकर युवक की तलाश की गई और मोबाइल फोन की लोकेशन भी ट्रैक की गई।

    इसके अलावा युवक की फोटो और विवरण जिला स्तर के व्हाट्सऐप ग्रुप्स में साझा किए गए, ताकि अधिक से अधिक पुलिसकर्मियों को सतर्क किया जा सके। पुलिस का यह भी दावा है कि, शुरुआती जांच में गड्ढे पर बैरिकेडिंग होने के संकेत मिले हैं, जिसकी सच्चाई जानने के लिए CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।

    घटना के बाद गरमाई राजनीति

    घटना के बाद दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आम आदमी पार्टी ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इस हादसे को सरकारी लापरवाही का नतीजा बताते हुए कहा कि, एक मासूम युवक गड्ढे में गिरकर पूरी रात पड़ा रहा और उसकी मौत हो गई। सरकार ने नोएडा की घटना से भी कोई सबक नहीं लिया।

    वहीं सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा , अगर जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

    नोएडा की घटना की दिलाई याद

    यह हादसा हाल ही में नोएडा सेक्टर-150 में हुई घटना की याद दिलाता है, जहां 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह दिखाते हैं कि निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

    बड़ा सवाल

    • सड़क खोदने की जिम्मेदारी किसकी?
    • बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए जाते?
    • हादसे के बाद जवाबदेही तय क्यों नहीं होती?

    कमल की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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