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स्मार्ट ग्लासेस या ट्रेप...!टेक्नोलॉजी ने आसान बनाई जिंदगी, लेकिन बढ़ा खतरा

स्मार्ट ग्लासेस महिलाओं और आम लोगों की प्राइवेसी के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। पब्लिक जगहों पर बिना इजाजत रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड और हरासमेंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में इस पर कोई खास कानून नहीं है, इसलिए लोगों को अलर्ट रहना और सावधानी बरतना जरूरी है।
टेक्नोलॉजी ने आसान बनाई जिंदगी, लेकिन बढ़ा खतरा
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    स्मार्ट ग्लासेस जैसी नई टेक्नोलॉजी ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है। ये ग्लास हाथ फ्री रहते हुए फोटो लेने, ट्रांसलेशन और वॉयस असिस्टेंट जैसी सुविधाएं देते हैं। लेकिन अब ये महिलाओं और आम लोगों की प्राइवेसी के लिए खतरा बन रहे हैं।

    स्टाइल या खतरा: स्मार्ट ग्लास का गलत इस्तेमाल

    कुछ लोग इन्हें स्टाइल या शौक के लिए पहनते हैं, लेकिन कई पुरुष ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ के नाम पर महिलाओं को बिना बताए रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर देते हैं। बस स्टॉप, बीच, सड़क या अन्य पब्लिक जगहों पर यह खतरा सबसे ज्यादा है।

    महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाएं

    इंग्लैंड में एक महिला ने होटल में चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करने वाले व्यक्ति को कोर्ट तक घसीटा। अमेरिका में एक सुपरमार्केट में भी महिला का वीडियो बिना इजाजत रिकॉर्ड किया गया और सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। ऐसे कई मामले महिलाओं की सुरक्षा और प्राइवेसी पर सवाल खड़े करते हैं।

    पब्लिक जगहों पर प्राइवेसी का डर

    मोबाइल फोन में कैमरा दिखाई देता है, इसलिए सामने वाला जान लेता है कि रिकॉर्डिंग हो रही है। लेकिन स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा आंखों पर छिपा होता है, जिससे पता ही नहीं चलता कि कोई रिकॉर्ड कर रहा है।

    कानून अभी भी पीछे

    अमेरिका और ब्रिटेन में पब्लिक स्पेस में बिना इजाजत वीडियो रिकॉर्ड करना कई जगह कानूनी नहीं माना जाता, लेकिन नियम हर जगह अलग हैं। भारत में भी स्मार्ट ग्लासेस पर कोई खास कानून नहीं है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत पब्लिक जगहों पर रिकॉर्डिंग करना बिना बताए कानूनी रूप से रोका नहीं गया है।

    महिलाओं को खुद अलर्ट रहने की जरूरत

    स्मार्ट ग्लासेस के चलते महिलाओं को अलर्ट रहना जरूरी है। उन्हें पता होना चाहिए कि स्मार्ट ग्लासेस कैसे दिखते हैं और कैसे पहचाने जा सकते हैं।

    आगे क्या किया जाना चाहिए?

    पब्लिक जगहों पर रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट और सख्त नियम बनाए जाने की जरूरत है। टेक्नोलॉजी ऐसी होनी चाहिए जो केवल पहनने वाले की नीयत पर निर्भर न करे। महिलाओं और आम लोगों की प्राइवेसी और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कानून और टेक्नोलॉजी दोनों में सुधार जरूरी है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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