Naresh Bhagoria
7 Feb 2026
मनोज चौरसिया, भोपाल। अब नाम रखने का चलन बदल गया है। लोग अपने बच्चों का नाम भगवान, देवी-देवताओं और पवित्र नदियों के नाम पर रख रहे हैं, लेकिन यहां ज्यादातर लोग पर्यायवाची नाम पसंद कर रहे हैं, मिसाल के तौर पर देखें तो कोलार निवासी संजीव ने अपने बेटे का नाम जहां भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर बेटे का नाम कृष्णा, तो विशाल गुप्ता ने अपने बेटे का भगवान शिव के नाम पर शिवाय रखा है।
बच्चों के नामकरण के लिए इन दिनों माता-पिता सनातन परपंरा के अनुसार नाम तलाश रहे हैं। इसके लिए ज्योतिषाचार्यों के चक्कर काट रहे हैं। पंडितों के अनुसार एक बार फिर पुराना ट्रेंड शुरू हो गया है। लोगों के बीच राम, सीता, कृष्ण, राधा, लक्ष्मी, शिव, शंकर, संतोष, महेश, गणेश, विष्णु जैसे नामों के प्रति आकर्षण बढ़ा है, लेकिन उनके पयार्वाची नाम भी तलाशे जा रहे हैं।
ज्योतिषाचार्यों और पंडितों के अनुसार बीत दो-तीन बर्षों में बच्चों के नामकरण को लेकर परिजनों की प्राथमिकताएं बदली हैं। कुछ साल पहले तक आधुनिकता से प्रेरित होकर नाम रखते थे। अब माता-पिता चाहते हैं नाम के साथ उनसे जुड़े गुण और संस्कार भी बच्चे के जीवन में उतरें। यहीं कारण है कि वर्तमान समय में अष्टलक्ष्मी जैसे नाम खासे लोकप्रिय हो रहे हैं।
नए तकनीकी युग के बावजूद समाज में नवजात शिशुओं के नामकरण के लिए सनातनी परंपरा और ज्योतिषीय परामर्श का प्रचलन फिर से बढ़ रहा है। माता-पिता बच्चों के लिए ऐसे नाम तलाश रहे हैं जो सुनने में सुंदर हों, बल्कि ज्योतिषीय रूप से शुभ और आध्यात्मिक रूप से अर्थपूर्ण भी हों। देवी-देवताओं के नामों को प्राथमिकता दी जा रही है।
पंडित जगदीश शर्मा, ज्योतिषाचार्य
बेटी के जन्म के बाद नाम तलाश रहे थे, तो कई नाम सामने आए। देवी लक्ष्मी के नाम पर बिटिया का नाम श्रिया रखा है, इससे देवी के नाम का भी उच्चारण हो जाता है।
शैलेष मिश्रा, रहवासी नीलबड़
बेटी की कुंडली में पृथ्वी के नाम पर आया, इसलिए उसका उर्वी (पृथ्वी) रखा है। घर का नाम श्रीजी रखा ताकि राधेरानी का भी जाप रहता है।
रोहित लखेरा, हर्षवर्घन नगर