Shivani Gupta
6 Feb 2026
नई दिल्ली/वॉशिंगटन डीसी। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अमेरिकी व्हाइट हाउस ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ को हटा दिया है। इसके तहत अब भारत से अमेरिका में भेजे जाने वाले उत्पादों पर केवल 18 प्रतिशत सामान्य आयात शुल्क लागू होगा। यह संशोधित टैरिफ 7 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह आदेश उन सभी उत्पादों पर लागू होगा जो 7 फरवरी 2026 के बाद अमेरिका में खपत के लिए पहुंचेंगी या वेयरहाउस से निकाली जाएंगी। इसका मतलब है कि, अब भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% एड-वेलोरम ड्यूटी लागू नहीं होगी।
अमेरिकी कस्टम्स द्वारा पहले ही वसूले गए 25% अतिरिक्त टैरिफ के लिए भी राहत दी गई है। इस रिफंड की प्रक्रिया अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के नियमों के तहत होगी। आयातक या कस्टम एजेंट को दस्तावेज जमा करने होंगे, अधिकतर मामलों में रिफंड इलेक्ट्रॉनिक तरीके से और बिना ब्याज के किया जाएगा।
इससे पहले अमेरिकी टैरिफ और अतिरिक्त शुल्क भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। अब इस कदम से उनके लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश आसान होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अंतरिम व्यापार समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि, यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगा और भारतीय MSME, किसान, स्टार्टअप, मछुआरों, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा।
मोदी ने कहा कि इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच निवेश, टेक्नोलॉजी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को और मजबूत किया जा सकेगा।
भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement - ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैरिफ 50% घटाकर 18% कर दिया गया। रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ भी हटा दिया गया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि, यह फ्रेमवर्क भारतीय और अमेरिकी बाजारों के लिए नियमों को सरल बनाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाएगा।
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए) के अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। खासतौर पर MSME, किसान, मछुआरे, महिलाओं और युवाओं को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।
टैरिफ घटाकर 18% किया गया: अब भारत से आने वाले अधिकांश उत्पादों पर सिर्फ सामान्य 18% ड्यूटी लगेगी।
कुछ उत्पादों पर जीरो टैरिफ: जेनेरिक दवाइयां, रत्न और हीरे, विमान पार्ट्स पर अब कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगेगा।
नए व्यापार के अवसर: टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और मशीनरी के निर्यात में इजाफे की संभावना है।
सेक्शन 232 में छूट: विमान पार्ट्स पर अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत विशेष छूट मिलेगी।
कृषि और डेयरी सुरक्षा: भारत के कृषि और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
निर्यातकों को फायदा: इससे भारतीय निर्यातकों और उद्योगों को अमेरिकी बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा।
इस समझौते में नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी ध्यान दिया गया है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं हैं, लेकिन व्यापार में रुकावट डालती हैं।
मेडिकल डिवाइस: भारत में अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को अब लाइसेंस प्रक्रिया आसान और तेज मिलेगी।
आईटी और टेक उत्पाद: अमेरिकी ICT उत्पादों के लिए भारत में लाइसेंस की प्रक्रिया सरल होगी।
स्टैंडर्ड और टेस्टिंग: भारत चयनित क्षेत्रों में अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को मान्यता देगा, जिससे दोबारा जांच की जरूरत नहीं होगी।
इन उपायों से व्यापार समय और लागत दोनों में बचत होगी।
भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से कुल 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की योजना बनाई है। इसमें एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान और विमान पार्ट्स, कीमती धातुएं, टेक्नॉलॉजी उत्पाद, कोकिंग कोल शामिल हैं। इस खरीद से भारत को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और तकनीक तक पहुंच सुनिश्चित होगी।
दोनों देश डिजिटल ट्रेड, ई-कॉमर्स, डेटा फ्लो और क्लाउड सर्विसेज में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर भी काम करेंगे। इससे भारतीय आईटी कंपनियां, स्टार्टअप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेरिकी बाजार में आसानी से प्रवेश कर सकेंगे। साथ ही अमेरिकी टेक्नोलॉजी जैसे GPU और डेटा सेंटर उपकरण के आयात से भारत का AI और डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा।
2 अप्रैल 2025: अमेरिका ने भारत पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया।
5 अप्रैल 2025: 26% टैरिफ का ऐलान।
1 अगस्त 2025: भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लागू।
6 अगस्त 2025: रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ।
27 अगस्त 2025: कुल 50% टैरिफ।
2 फरवरी 2026: अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18% किया।
7 फरवरी 2026: अंतरिम व्यापार समझौता (ITA) लागू।
भविष्य में दोनों देश चुनिंदा क्षेत्रों में टैरिफ और नियमों में बदलाव कर सकते हैं, ताकि व्यापार को सरल और पारदर्शी बनाया जा सके।