नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 4 फरवरी 2026 को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया था, लेकिन यह नोटिफिकिशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है क्योंकि इसमें एक नहीं बल्कि गई सारी स्पेलिंग मिस्टेक्स और टाइपो एरर्स पाए गए हैं। इससे UPSC की प्रतिष्ठित सटीकता पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर उन छात्रों में जो वर्षों तक भाषा और व्याकरण पर मेहनत करते हैं।
कहां-कहां दिखीं बड़ी गलतियां?
UPSC के CSE और IFS 2026 नोटिफिकेशन में कई पेजों पर गंभीर स्पेलिंग और टाइपो एरर्स सामने आए हैं।
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पेज नंबर 2 पर Examination शब्द को Examinaiton और Candidates को Cadidates लिखा गया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ ही लाइनों बाद यही शब्द सही स्पेलिंग के साथ भी मौजूद हैं, जिससे साफ होता है कि दस्तावेज की ठीक से प्रूफरीडिंग नहीं की गई।
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पेज नंबर 7 पर Benchmark को Bechmark और Functional को Functinal लिखा गया है।
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पेज नंबर 8 पर Abbreviations की जगह Abbriviations लिखा हुआ है।
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पेज नंबर 9 पर परीक्षा केंद्रों की सूची में Kolkata को KOLKATTA लिखा गया है, जबकि उसी पेज पर एक जगह सही स्पेलिंग भी दर्ज है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने आयोग को खरी-खोटी सुनाई
UPSC का यह नोटिफिकेशन सामने आते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। यूजर्स और अभ्यर्थियों ने नोटिफिकेशन में मौजूद स्पेलिंग और भाषा संबंधी गलतियों के स्क्रीनशॉट शेयर करने शुरू कर दिए। कई उम्मीदवारों ने सवाल उठाया कि अगर वे परीक्षा या आंसर शीट में ऐसी ही गलतियां करते हैं, तो उनके नंबर काट लिए जाते हैं। ऐसे में आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में इतनी बुनियादी गलतियां कैसे रह गईं?
एक यूजर ने दावा किया कि पूरे नोटिफिकेशन में 40 से ज्यादा स्पेलिंग और भाषा संबंधी त्रुटियां हैं। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस शुरू हो गई।
आयोग के कामों पर उठे गंभीर सवाल
यूपीएससी भारत सरकार की एक संवैधानिक संस्था है, जो IAS, IPS और IFS जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करती है। इन्हीं अधिकारियों के कंधों पर आगे चलकर जिले का प्रशासन, कानून-व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में आधिकारिक नोटिफिकेशन में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां मिलने से आयोग के प्रोफेशनलिज्म और बारीकियों पर ध्यान देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।