सीहोर में 500 किसानों का जल सत्याग्रह, पार्वती-कुलासी नदी में उतरकर बजाई थाली; बिजली अफसरों पर FIR की मांग

सीहोर। किसानों ने सीहोर विद्युत मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, विद्युत लाइनों को दुरुस्त कराने और बिजली बिलों में राहत देने की मांग उठाई है। करीब 25 गांवों के 500 से अधिक किसान पिछले दो माह से इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
पार्वती नदी में उतरकर किसानों ने जताया विरोध
सीहोर और शाजापुर जिले के किसानों ने पार्वती नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। किसानों ने पानी में खड़े होकर थाली बजाई और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया। किसानों का कहना है कि खेतों के ऊपर और गांवों के आसपास विद्युत लाइनें लंबे समय से झूल रही हैं। इसके चलते किसानों और ग्रामीणों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है।
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कुलासी नदी में भी पहुंचा आंदोलन
भोपाल जिले के ग्राम टीलाखेड़ी सहित आसपास के किसानों ने शनिवार को कुलासी नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि कई गांवों में विद्युत लाइनों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है।
भैंसा-नागिन में किसान की मौत का मामला
किसान नेता प्रहलाद हाड़ा के अनुसार, ग्राम भैंसा-नागिन में करीब पांच माह पहले खेत में काम कर रहे किसान की झूलती 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। किसानों ने इसके अलावा ग्राम ढाबला में किसान की मौत, बरबेली में किसान के गंभीर रूप से घायल होने और ग्राम मोरिया में महिला किसान की विद्युत लाइन की चपेट में आने से मौत के मामलों का भी उल्लेख किया है।
गाय की मौत का भी किसानों ने किया दावा
किसानों के अनुसार ग्राम कुलास कला में विद्युत करंट की चपेट में आने से गाय की मौत का मामला भी सामने आया। किसानों का आरोप है कि खेतों और गांवों के बीच विद्युत लाइनों की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इंसानों के साथ पशुओं की जान को भी खतरा बना हुआ है। किसानों ने विद्युत व्यवस्था की जांच कर खतरनाक और झूलती लाइनों को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
किसानों की मुख्य मांग सीहोर विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और श्यामपुर के सहायक यंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की है। किसानों का कहना है कि हादसों के बाद लाइनमैन स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, लेकिन जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर विद्युत व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी है, उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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25 गांवों के 500 से ज्यादा किसान आंदोलन में
किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में करीब 25 गांवों के 500 से अधिक किसान आंदोलन से जुड़े हैं। किसानों के अनुसार पिछले दो महीने से अलग-अलग स्तर पर धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन देने का सिलसिला चल रहा है। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री, प्रभारी मंत्री, राज्यपाल, विद्युत मंडल के एमडी ऋषि गर्ग, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
बिजली बिलों में राहत की भी मांग
रविवार को किसान अनीश मियां, पूर्व सरपंच, किसान रफीक निवासी धोबीखेड़ी, भगवानसिंह मेवाड़ा निवासी बड़वेली तथा टीलाखेड़ी और देवली के पूर्व सरपंच इरफान भाई सहित अन्य किसानों ने बिजली बिलों की समस्या भी उठाई। किसानों का कहना है कि घरेलू कनेक्शनों पर अपेक्षाकृत अधिक बिजली बिल आने से ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने बिलों की जांच कर राहत देने और अनियमितताओं का निराकरण करने की मांग की।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा व्यापक
किसानों ने चेतावनी दी कि विद्युत लाइनों को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया, बिजली बिलों की समस्या का समाधान नहीं हुआ और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसानों ने कहा कि अलग-अलग गांवों में धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को भोपाल से दिल्ली तक ले जाया जाएगा। किसानों ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रधानमंत्री से न्याय की मांग करने की बात भी कही है।


















