रीवा के संजय गांधी अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा, मेन गेट पर धरने पर बैठे परिजन

रीवा। संजय गांधी अस्पताल में भर्ती सतना निवासी अर्चना गुप्ता की सोमवार रात इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंगलवार को अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। परिजन दोषी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
पांच दिन में नहीं सुधरी तबीयत
परिजनों के अनुसार, 30 अगस्त को स्कूटी हादसे के बाद अर्चना को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस वक्त वह सामान्य रूप से बातचीत कर रही थीं। लगभग पांच दिन बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू-2 में शिफ्ट किया गया। परिजनों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद मरीज को अन्य अस्पताल रेफर नहीं किया गया और वीडियो बनाने पर डॉक्टर ने मोबाइल भी छीन लिया। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इलाज पूरी तरह मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में किया जा रहा था। फिलहाल परिजनों का धरना जारी है।
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आधी रात कलेक्टर पहुंचे थे अस्पताल, गंदगी और नदारद डॉक्टरों पर भड़के
संजय गांधी अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं की मिल रही लगातार शिकायतों के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई सीनियर ड्यूटी डॉक्टर गैरहाजिर मिले और कुल 300 कर्मचारियों में से केवल 190 ही उपस्थित पाए गए। वार्डों में फैली भीषण गंदगी और अव्यवस्था देखकर कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने अधिकारियों को फटकारते हुए कहा, 'ये अस्पताल है या कोई कचरा खाना? यह सरकारी पैसा है, लूट मचाने का संस्थान नहीं।'
7 दिन का वेतन काटने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान ऑथोर्पेडिक्स वार्ड में खुले में पुराने गद्दे पड़े मिलने पर कलेक्टर ने वार्ड इंचार्ज का 7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। सफाई और सुरक्षा व्यवस्था लचर मिलने पर कर्मचारियों को चेतावनी दी गई कि व्यवस्थाएं तत्काल सुधारी जाएं, वे कभी भी रात 2 बजे या सुबह 6 बजे दोबारा जांच करने आ सकते हैं।
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प्रभारी डीन को दी सख्त हिदायत
अस्पताल में बीते दो हफ्तों में प्रसूता-नवजात की मौत, जीवित बुजुर्ग को मृत बताकर मॉच्यूर्री भेजने और मरीज के घाव में कीड़े लगने जैसे तीन गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। कलेक्टर ने प्रभारी डीन को सभी डॉक्टरों की समय पर मौजूदगी और मरीजों को स्वच्छ वातावरण देने की सख्त हिदायत दी।




















