कच्ची शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं ने खोला मोर्चा, ग्राम सभाओं में लिया नशामुक्ति का संकल्प
सोहागपुर। आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों को नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने के लिए अब गांव की महिलाएं खुद आगे आकर मोर्चा संभाल रही हैं। सोमनाथ आदिवासी मजदूर संगठन के अभियान के तहत आदिवासी महिलाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता और एकजुटता बढ़ रही है। गांवों में बनने और बिकने वाली अवैध कच्ची शराब का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ने को देखते हुए ग्रामीणों ने इसके खिलाफ सामूहिक कदम उठाने का फैसला किया है। सोमनाथ आदिवासी मजदूर संगठन के संयोजक और सोहागपुर के पूर्व जनपद उपाध्यक्ष राजकुमार रघुवंशी की पहल पर महिलाओं ने गांव-गांव में नशामुक्ति अभियान शुरू किया है। महिलाएं बैठकों और चौपालों के जरिए ग्रामीणों को शराब के नुकसान के बारे में जागरूक कर रही हैं। कई गांवों में महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे हैं।
पतियों के शराब पीने के खिलाफ भी महिलाओं की आवाज
अवैध शराब के कारण परिवारों पर पड़ रहे असर को देखते हुए महिलाओं ने गांवों में खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। कई स्थानों पर महिलाएं संगठित होकर शराब के सेवन और अवैध बिक्री का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि शराब की वजह से परिवारों में विवाद बढ़ते हैं, घरेलू आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है और अपराध जैसी समस्याओं को भी बढ़ावा मिलता है। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में अवैध रूप से बनने और बिकने वाली कच्ची शराब पर प्रभावी रोक लगाई जाए और इसके कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ग्राम सभाओं में लिया गया बड़ा फैसला
नशामुक्ति अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम सभाओं में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जा रहे हैं। इन प्रस्तावों में गांव में महुआ की कच्ची शराब बनाने, बेचने और पीने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि यदि कोई व्यक्ति गांव में अवैध रूप से कच्ची शराब बनाते, बेचते या उसका सेवन करते पाया जाता है, तो इसकी सूचना प्रशासन और पुलिस को दी जाएगी ताकि नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
एसडीएम को सौंपा ग्राम सभा का प्रस्ताव
ग्राम सभाओं में पारित प्रस्ताव की प्रतियां संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए ग्रामीणों ने प्रशासनिक सहयोग की मांग की है। ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सोहागपुर डॉ. बबीता राठौर को लिखित आवेदन देकर गांवों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की। प्रस्ताव की प्रतियां पुलिस और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं ताकि अवैध शराब के कारोबार पर निगरानी रखी जा सके।
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अधिकारियों ने कार्रवाई का दिया भरोसा
आदिवासी महिलाओं की शिकायत और मांग के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम डॉ. बबीता राठौर और टीआई गिरीश त्रिपाठी ने महिलाओं और ग्रामीणों को अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। क्षेत्र में पुलिस की ओर से कुछ स्थानों पर कार्रवाई भी की गई है। इस दौरान कच्ची शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को नष्ट करने के साथ ही अवैध शराब की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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महिलाओं की पहल बन रही मिसाल
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र की आदिवासी महिलाएं गांव-गांव में कच्ची शराब के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही हैं। महिलाएं न सिर्फ लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रही हैं बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के सामने भी अपनी बात मजबूती से रख रही हैं।






















