राजनांदगांव में 10वीं की परीक्षा देने के बाद भी फेल, 3 साल से रिजल्ट के लिए भटक रही छात्रा, कलेक्ट्रेट पहुंचा परिवार

रायपुर/राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट को लेकर एक छात्रा और उसके परिवार ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। ग्राम उपरवाह निवासी भारती साहू के परिजनों का आरोप है कि वर्ष 2023 में छात्रा ने सभी विषयों की परीक्षा दी थी, लेकिन रिजल्ट में एक विषय में उसे अनुपस्थित दर्शाकर फेल कर दिया गया। इसके बाद सुधार का आश्वासन देकर दोबारा परीक्षा दिलाई गई, लेकिन परिणाम में भी सप्लीमेंट्री दर्शाए जाने का दावा परिवार ने किया है। करीब तीन साल से चल रहे इस विवाद को लेकर परिवार कलेक्ट्रेट पहुंचा और रिकॉर्ड की जांच कर संशोधित अंकसूची जारी करने की मांग की।
तीन साल से रिजल्ट की लड़ाई, अब कलेक्ट्रेट पहुंचा परिवार
राजनांदगांव के घुमका क्षेत्र के ग्राम उपरवाह की छात्रा भारती साहू के 10वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर विवाद सामने आया है। परिवार का कहना है कि वर्ष 2023 में भारती ने बोर्ड परीक्षा के सभी विषयों में परीक्षा दी थी, इसके बावजूद एक विषय में उसे ‘Absent’ दिखाकर फेल कर दिया गया। परिजनों के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने स्कूल स्तर पर शिकायत की और रिजल्ट सुधारने की मांग की। परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार सुधार का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

सभी पेपर देने का दावा, रिजल्ट में एक विषय में ‘Absent’
छात्रा के पिता मिथिलेश साहू ने शिकायत में बताया कि उनकी बेटी परीक्षा में उपस्थित रही थी। परिवार का दावा है कि इंग्लिश के प्रोजेक्ट में भी छात्रा शामिल हुई थी। इसके बावजूद बोर्ड के परिणाम में उसे एक विषय में अनुपस्थित दिखाया गया। इसी आधार पर छात्रा का परिणाम प्रभावित हुआ और वह फेल हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि स्कूल के परीक्षा प्रभारी और संबंधित शिक्षकों की ओर से भेजी गई उपस्थिति संबंधी जानकारी में गलती हुई, जिसका खामियाजा छात्रा को भुगतना पड़ा।

गलती सुधारने के बजाय दोबारा परीक्षा दिलाने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, जब उन्होंने स्कूल में रिजल्ट को लेकर सवाल उठाए तो उन्हें बताया गया कि सप्लीमेंट्री परीक्षा का फॉर्म भरने के बाद मार्कशीट में सुधार हो जाएगा। इसके बाद भारती ने दोबारा परीक्षा दी। परिवार को उम्मीद थी कि इस प्रक्रिया के बाद उसकी मूल परीक्षा से जुड़ी समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन परिणाम सामने आने के बाद परिवार का दावा है कि छात्रा को पास तो किया गया, लेकिन रिकॉर्ड में सप्लीमेंट्री का उल्लेख रहा। इसके बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी।

एक ही नाम की तीन छात्राएं बनीं भ्रम की वजह?
स्कूल की प्रिंसिपल निखिला वर्मा के मुताबिक, परीक्षा में भारती साहू नाम की तीन छात्राएं शामिल हुई थीं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार इसी वजह से रिकॉर्ड को लेकर भ्रम की स्थिति बनी। अब सवाल यह है कि परीक्षा के दौरान छात्रा की वास्तविक उपस्थिति, विषयवार रिकॉर्ड और बोर्ड को भेजी गई जानकारी में आखिर क्या दर्ज किया गया था। इसी बिंदु को लेकर परिवार ने संबंधित दस्तावेजों और परीक्षा रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
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कलेक्ट्रेट में शिकायत, रिकॉर्ड जांच की मांग
मामले को लेकर छात्रा और उसके परिजन स्थानीय विधायक हर्षिता बघेल के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। परिवार ने लिखित शिकायत देकर वर्ष 2023 की बोर्ड परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। परिजनों की मांग है कि परीक्षा केंद्र के उपस्थिति रिकॉर्ड, संबंधित विषय के दस्तावेज और बोर्ड को भेजी गई जानकारी का मिलान कराया जाए। परिवार चाहता है कि यदि रिकॉर्ड से छात्रा की उपस्थिति की पुष्टि होती है तो उसके मूल परीक्षा परिणाम के आधार पर संशोधित अंकसूची जारी की जाए।

विधायक ने कहा- बच्ची का भविष्य प्रभावित हुआ
डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने मामले में छात्रा को समय पर न्याय मिलने की मांग की है। विधायक के मुताबिक, यदि छात्रा ने परीक्षा दी थी और रिकॉर्ड में उसे अनुपस्थित दिखाया गया है तो मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक परिणाम को लेकर बनी स्थिति से छात्रा मानसिक दबाव में रही और उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से मामले को लेकर चर्चा किए जाने की जानकारी भी दी है।
DEO बोले- मामले की जांच के बाद होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल के मुताबिक, मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। छात्रा के संशोधित परिणाम के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई है। मामला वर्ष 2023 की परीक्षा से जुड़ा होने के कारण पुराने परीक्षा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

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अब सबसे बड़ा सवाल: तीन साल बाद कब मिलेगा सही रिजल्ट?
मामले में अब परिवार की नजर प्रशासनिक जांच और माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्रवाई पर है। परिवार की मांग है कि छात्रा की वास्तविक परीक्षा उपस्थिति की पुष्टि कर उसे उसके मूल परीक्षा रिकॉर्ड के आधार पर न्याय दिया जाए। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल 2026 में भी 10वीं की द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा आयोजित कर चुका है और उसका परिणाम अगस्त 2026 में जारी किया गया था। इससे स्पष्ट है कि बोर्ड स्तर पर परीक्षा और परिणाम की अलग-अलग प्रक्रियाएं संचालित होती हैं।




















