RDA के 20 करोड़ के प्लॉट पर बवाल,वन मंत्री की पत्नी की कंपनी को कचना की जमीन के बदले सड्डू में जमीन देने का आरोप

प्रेम कुमार,रायपुर: राजधानी रायपुर में रायपुर विकास प्राधिकरण की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में प्रस्तावित भूखंडों के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस नेता एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना की जमीन के बदले सड्डू में करीब 23,327 वर्गफीट का प्लॉट प्रस्तावित किया गया है। गुप्ता ने इसकी संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताते हुए मुख्य सचिव से जांच और योजना निरस्त करने की मांग की है। RDA का कहना है कि दावा-आपत्ति आने पर प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी।
कचना की जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट देने का आरोप
डॉ. राकेश गुप्ता के मुताबिक, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना के नालापारा क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनका आरोप है कि इस जमीन को नगर विकास योजना में शामिल किए जाने के बाद कंपनी को कचना के बजाय सड्डू में प्लॉट नंबर 25 प्रस्तावित किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित भूखंड का क्षेत्रफल 2,168 वर्गमीटर यानी करीब 23,327 वर्गफीट है। यह भूखंड प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क के आसपास बताया गया है।

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20 करोड़ की कीमत का दावा कितना?
कांग्रेस नेता ने अनुमान लगाया है कि भविष्य में MR-43 सड़क विकसित होने के बाद इलाके में जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट तक पहुंच सकती है। इसी अनुमान के आधार पर उन्होंने प्लॉट की कीमत करीब 20 से 23 करोड़ रुपए तक बताई है। यह कीमत RDA की घोषित कीमत नहीं, बल्कि डॉ. गुप्ता द्वारा बताई गई संभावित बाजार कीमत का अनुमान है।

मंत्री की पत्नी से जुड़ी कंपनी पर क्या आरोप?
डॉ. गुप्ता ने दावा किया है कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप निदेशक हैं। उन्होंने 2023 के चुनावी शपथपत्र का हवाला देते हुए कंपनी में उनके नाम हिस्सेदारी/राशि का भी उल्लेख किया है। इसी कंपनी को सड्डू में प्रस्तावित भूखंड दिए जाने को लेकर कांग्रेस नेता ने आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों पर उपलब्ध रिपोर्टों में मंत्री केदार कश्यप की ओर से कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

एक किलोमीटर दूर प्लॉट मिलने पर सवाल
डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि पुनर्गठन के बाद अंतिम भूखंड मूल भूमि या उससे लगे क्षेत्र में दिए जाने से संबंधित प्रावधान हैं। उनका आरोप है कि कंपनी की मूल जमीन कचना में होने के बावजूद प्रस्तावित प्लॉट सड्डू में दिया जा रहा है और दोनों स्थानों के बीच करीब एक किलोमीटर का अंतर है। इसी बिंदु को लेकर उन्होंने आवंटन प्रक्रिया की कानूनी जांच की मांग की है।
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MR-43 के पास प्लॉट को लेकर भी विवाद
कांग्रेस नेता ने योजना में दूसरे भू-स्वामियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ भू-स्वामियों को प्रमुख सड़क के आसपास मिलने वाले भूखंडों के बजाय योजना के अंदरूनी हिस्सों में जमीन दी गई। गुप्ता ने दावा किया कि इससे भूखंडों के पुनर्गठन और अंतिम आवंटन की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि ये सभी दावे जांच के अधीन हैं और उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य सचिव से योजना निरस्त करने की मांग
डॉ. राकेश गुप्ता ने पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजने की बात कही है। उन्होंने लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना को निरस्त करने, भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

RDA का जवाब- दावा-आपत्ति के बाद होगी जांच
मामले में RDA का पक्ष भी सामने आया है। RDA CEO अवनीश शरण के मुताबिक भूखंड आवंटन को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई है। आपत्तियां आने पर संबंधित समिति उनके परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। RDA की ओर से यह भी कहा गया है कि नगर विकास योजना के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार भूखंडों का पुनर्गठन और आवंटन किया गया है।
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अब आगे क्या?
फिलहाल विवाद का केंद्र सड्डू के प्रस्तावित प्लॉट नंबर 25, कचना की मूल जमीन, दोनों स्थानों के बीच दूरी और फाइनल प्लॉट आवंटन से जुड़े नियम हैं। अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में उठाए गए सवालों पर RDA की समिति क्या निष्कर्ष देती है।




















