पैरामेडिकल टेक्निशियंस के लिए हिंदी में किताबें लॉन्च, हिंदी बेल्ट के राज्यों में लाखों स्टूडेंट्स-टेक्निशियंस को मिलेगा लाभ

भोपाल। भारत में पैरामेडिकल कोर्स पढ़ने वाले लाखों स्टूडेंट्स और हॉस्पिटल्स में काम करने वाले टेक्निशियंस के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सीबीएस पब्लिशर्स की पैरामेडिकल कोर्स और कार्यक्षेत्र से संबंधित तीन बहुपयोगी किताबें अब हिंदी में उपलब्ध हैं। इनसे हिंदी बेल्ट के लाखों स्टूडेंट्स और टेक्निशियंस को लाभ मिलेगा। मप्र सरकार के मानद चिकित्सक और भोपाल के जेके हॉस्पिटल में मेडिकल डायरेक्टर प्रो. डॉ. अभय कुमार चौधरी ने पैरामेडिकल टेक्निशियंस और स्टूडेंट्स के लिए तीन किताबें हिंदी में लिखी हैं।
ओटी, रेडियोलॉजी में काम की बातें
ये किताबें-ऑपरेशन कक्ष में कार्यरत टेक्निशियन, एक्स-रे विभाग में कार्यरत टेक्निशियन और किडनी मरीजों के डायलिसिस में कार्यरत टेक्निशियन हैं। इन किताबों के लेखक डॉ. चौधरी ने बताया कि ये टेक्निशियन 11वीं कक्षा के बाद पैरामेडिकल कोर्स पढ़कर अस्पतालों में कार्यरत होते हैं। इन टेक्निशियंस को अंग्रेजी पढ़ने और समझने में दिक्कत होती है। माना जा रहा है कि ये किताबें हिंदी बेल्ट के स्टूडेंट्स-टेक्निशियंस के लिए वरदान साबित होंगी।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने किया विमोचन
केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश शासन की योजना के तहत हिंदी भाषा में किताबें उपलब्ध होनी चाहिए। इसी मंशा के अनुरूप ढाई वर्षों की कड़ी मेहनत, अथक प्रयास और लगन से डॉ. चौधरी ने ये तीनों बहुपयोगी किताबें लिखीं। ये किताबें मेडिकल फील्ड के सुपर स्पेशिलिस्ट्स से बातचीत और विचार-विमर्श के बाद उनके अनुभवों के साथ अपने लंबे क्लीनिकल एक्सपीरिएंस के आधार पर तैयार की हैं। सरकार के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर 13 सितंबर 2026 को भोपाल में इन किताबों का विमोचन किया और पैरामेडिकल काउंसिल अलाइड हेल्थ के सभी संस्थानों में इन महत्वपूर्ण किताबों को भेजने के लिए निर्देशित किया।
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प्रो. भारद्वाज ने किया था विशेष अनुरोध
प्रो. डॉ. एके चौधरी का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने उनसे हिंदी में पैरामेडिकल बुक्स लिखने का अनुरोध किया था। देश में अभी तक पैरामेडिकल स्टडीज के लिए हिंदी में किताबें उपलब्ध नहीं थीं। डॉ. एके चौधरी ने प्रो. स्वर्गीय रामदेव भारद्वाज के अनुरोध और शासन की मंशा के अनुरूप पैरामेडिकल स्टूडेंट्स के लिए किताबें लिखने की ठानी और ढाई वर्ष के अथक परिश्रम और प्रयास के बाद उन्होंने ये तीन किताबें राष्ट्र को समर्पित कीं।
अनुभव और चिकित्सकीय ज्ञान पर आधारित
प्रो. चौधरी की इन किताबों का फायदा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड समेत सभी हिंदीभाषी प्रांतों के साथ देशभर के अन्य राज्यों में पढ़ रहे और काम कर रहे स्टूडेंट्स और टेक्निशियंस को मिलेगा। गहन अनुभव और चिकित्सकीय ज्ञान पर आधारित ये किताबें कुशल शिक्षक की तरह स्टूडेंट्स और टेक्निशियंस का मार्गदर्शन करेंगी।
इन राज्यों-शहरों में ये किताबें उपलब्ध
प्रो. चौधरी की ये किताबें मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, बंगाल, झारखंड, महराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड राज्यों के दिल्ली, हैदराबाद, नागपुर, पुणे, पटना, बेंगलुरू, चेन्नई, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई आदि शहरों में सीबीएस पब्लिशर्स पर उपलब्ध हैं।प्रो. अभय कुमार चौधरी की ये किताबें मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, बंगाल, झारखंड, महराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड राज्यों के दिल्ली, हैदराबाद, नागपुर, पुणे, पटना, बेंगलुरू, चेन्नई, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई आदि शहरों में उपलब्ध हैं।
सतीश कुमार जैन, प्रकाशक, दिल्ली
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तकनीशियनों के लिए बहुत महत्व की किताबें
मप्र शासन के मानसेवी चिकित्सक प्रो. अभय कुमार चौधरी द्वारा लिखित ये तीनों पुस्तकें हिंदी में पैरामेडिकल कोर्स कर रहे और काम कर रहे तकनीशियनों के लिए बहुत महत्व की हैं। पैरामेडिकल काउंसिल अलाइड हेल्थ के सभी संस्थानों में इन महत्वपूर्ण किताबों को भेजने के लिए निर्देशित किया गया है।
राजेंद्र शुक्ल, डिप्टी सीएम, मप्र शासन




















