DUSU President बनने के बाद मिलती है कॉलेज से खास छूट? अटेंडेंस से लेकर सैलरी तक जानें क्या हैं नियम

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी DUSU चुनाव 2026 के नतीजे सामने आ चुके हैं। ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। चुनाव के बाद छात्रों के बीच एक सवाल काफी चर्चा में रहता है- DUSU President बनने के बाद क्या छात्र को पढ़ाई, अटेंडेंस या कॉलेज के दूसरे नियमों में कोई खास छूट मिलती है? आइए जानते हैं अध्यक्ष के पद से जुड़े नियम और जिम्मेदारियां।
चुनाव लड़ने के लिए 75% अटेंडेंस जरूरी
DUSU चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए अटेंडेंस का नियम काफी अहम है। उपलब्ध दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े छात्र संघ संविधान में चुनाव लड़ने वाले छात्र के लिए पिछले अकादमिक वर्ष में कम से कम 75% अटेंडेंस की शर्त दी गई है। इसके अलावा उम्मीदवार के लिए पिछले अकादमिक वर्ष में कम से कम 60 प्रतिशत अंक और चुनाव वाले वर्ष में कोई अकादमिक बकाया नहीं होने जैसी शर्तें भी दी गई हैं। उम्र और अनुशासन से जुड़े नियम भी लागू होते हैं। यानी छात्र नेता बनने के लिए सिर्फ लोकप्रियता या चुनावी समर्थन पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय अकादमिक और पात्रता नियमों को पूरा करना भी जरूरी है।
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क्या अध्यक्ष बनने के बाद अटेंडेंस में छूट मिलती है?
यह सबसे बड़ा सवाल है। DUSU President बनने का मतलब यह नहीं है कि छात्र को अपने आप अटेंडेंस या पढ़ाई के नियमों से छूट मिल जाती है। छात्र संघ के संविधान में अध्यक्ष को यूनियन का मुख्य कार्यकारी प्रमुख बताया गया है, लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद क्लास, परीक्षा या दूसरे अकादमिक नियमों से सामान्य छूट का कोई अलग अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए DUSU President का पद अपने आप में किसी छात्र को कॉलेज की सामान्य अकादमिक व्यवस्था से बाहर नहीं करता।
अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या होती है?
DUSU President की भूमिका सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती। संविधान के मुताबिक अध्यक्ष यूनियन का Chief Executive Head होता है। अध्यक्ष केंद्रीय परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है और इन बैठकों को व्यवस्थित तरीके से चलाने की जिम्मेदारी उसकी होती है। उसका काम छात्रों के शैक्षणिक हितों को आगे बढ़ाने और यूनियन के कामकाज को संविधान के अनुसार संचालित करने से जुड़ा होता है। यानी अध्यक्ष का मुख्य काम छात्रों की आवाज को संगठित करना और यूनियन के माध्यम से उनके मुद्दों पर काम करना है।
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क्या DUSU President को अलग ऑफिस मिलता है?
छात्र संघ के कामकाज के लिए यूनियन का आधिकारिक ढांचा होता है। इसका इस्तेमाल बैठकों और छात्र संघ से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है। हालांकि, इसे अध्यक्ष का निजी ऑफिस या व्यक्तिगत सुविधा नहीं माना जा सकता। यूनियन से जुड़ी सुविधाएं छात्र संघ के आधिकारिक काम के लिए होती हैं।
क्या DUSU President को सैलरी मिलती है?
DUSU President का पद नियमित सरकारी या निजी नौकरी जैसा पद नहीं है। उपलब्ध छात्र संघ संविधान में अध्यक्ष और अन्य निर्वाचित पदाधिकारियों के लिए नियमित सैलरी या वेतन का प्रावधान नहीं दिया गया है। इसलिए अध्यक्ष बनने के बाद किसी छात्र को मासिक वेतन वाली नौकरी मिलने जैसा लाभ नहीं मिलता।
यूनियन फंड का पैसा किस काम आता है?
DUSU या छात्र संघ से जुड़े फंड को अध्यक्ष की निजी रकम नहीं माना जाता। संविधान के मुताबिक यूनियन के फंड का इस्तेमाल छात्रों के कल्याण और स्वीकृत गतिविधियों के लिए किया जाता है। खर्च के लिए बजट की मंजूरी जरूरी होती है और फंड का इस्तेमाल तय नियमों के अनुसार किया जाता है। खातों की ऑडिट व्यवस्था भी निर्धारित है। इसका मतलब साफ है कि यूनियन का पैसा अध्यक्ष की निजी आय या सैलरी नहीं है।
अध्यक्ष कब तक पद पर रहता है?
छात्र संघ के उपलब्ध संविधान के मुताबिक यूनियन का कार्यकाल चुनाव परिणाम घोषित होने से उस अकादमिक सत्र के अंत तक रहता है। साथ ही, छात्र के छात्र बने रहने से उसकी यूनियन सदस्यता जुड़ी होती है। इसलिए DUSU President का पद छात्र जीवन से जुड़ी एक निर्वाचित जिम्मेदारी है, कोई स्थायी पद या नौकरी नहीं।
आखिर DUSU President बनने पर क्या मिलता है?
DUSU President बनने के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी छात्रों का प्रतिनिधित्व करना और छात्र संघ के कामकाज का नेतृत्व करना है। अध्यक्ष केंद्रीय परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है और यूनियन से जुड़े मामलों में मुख्य भूमिका निभाता है। वहीं पढ़ाई, परीक्षा, अटेंडेंस या कॉलेज के सामान्य नियमों से अपने आप कोई विशेष छूट नहीं मिलती। चुनाव लड़ने के लिए ही अकादमिक पात्रता और अटेंडेंस जैसी शर्तें लागू हैं।



















