फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी का अपहरण, 13 लाख और जेवर वसूले; 6 आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ। कारोबारी ने 13 सितंबर को कृष्णानगर थाने में अपहरण और फिरौती का मामला दर्ज कराया था। बदमाशों ने फर्जी पुलिस आईडी दिखाकर कारोबारी को कार में बैठाया और उसके साथ मारपीट की। पुलिस की आठ टीमों ने करीब 220 से 240 CCTV फुटेज खंगालकर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि कारोबारी की रेकी और उसकी आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाने के बाद वारदात की गई थी।
फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी को बनाया बंधक
राजेंद्रनगर निवासी कारोबारी सुदर्शन घोष ने 13 सितंबर को कृष्णानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। कारोबारी के मुताबिक, वह अपने कार्यालय जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर उन्हें जबरन कार में बैठा लिया। इसके बाद आरोपियों ने हथियार के बल पर उन्हें बंधक बनाया और मारपीट की। बदमाशों ने कारोबारी पर दबाव बनाकर उनकी पत्नी को फोन कराया और घर से रकम और जेवर मंगवाए।
वारदात पहले से सुनियोजित थी
पुलिस की जांच में सामने आया कि वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि आरोपियों ने इसकी पहले से योजना बनाई थी। पुलिस के मुताबिक, लखनऊ में रहने वाले एक व्यक्ति के जरिए कारोबारी की आर्थिक स्थिति और रोजाना की आवाजाही की जानकारी जुटाई गई थी। यह व्यक्ति पीड़ित का करीबी बताया जा रहा है। इसके बाद गिरोह के सदस्यों ने कारोबारी की लगातार रेकी की और सही मौका मिलने पर उसे अगवा कर लिया।
8 पुलिस टीमों ने खंगाले 240 CCTV फुटेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने खुलासे के लिए आठ विशेष टीमों के साथ सर्विलांस सेल को भी जांच में लगाया। टीमों ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों के आने-जाने वाले रास्तों तक करीब 220 से 240 CCTV फुटेज की जांच की। तकनीकी साक्ष्यों और मैनुअल इनपुट के आधार पर पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। इसके बाद पुलिस ने गिरोह से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
छह आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, अनुराग कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे वारदात के दौरान पहचान छिपाने के लिए गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे। घटना के बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में भाग गए थे। पुलिस अब इनके अन्य साथियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे आरोपी
पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपियों ने वसूली गई रकम को आपस में बांट लिया था और अलग-अलग राज्यों में चले गए थे। पुलिस का दावा है कि गिरोह के कुछ सदस्य दोबारा लखनऊ में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस टीम को उनकी गतिविधियों की जानकारी मिली और घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़े दूसरे लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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फरार आरोपियों की तलाश जारी
छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। साथ ही कारोबारी से वसूली गई रकम और जेवरों में से बाकी सामान बरामद करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है, ताकि वारदात में शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने आ सके।




















