सीवन-पार्वती संगम धाम को विश्व पहचान दिलाने का संकल्प, 25 मीटर चुनरी चढ़ाई

सीहोर। सीवन-पार्वती संगम धाम को विश्व प्रसिद्ध पहचान दिलाने और नदियों के संरक्षण के संकल्प के साथ सीवन पुत्र टीम का ‘चलो सीवन-पार्वती संगम धाम’ अभियान मनाखेड़ा पहुंचा। महिला घाट सीहोर से शुरू हुई यात्रा में नदी संरक्षण, स्वच्छता और देशभक्ति के संदेश गूंजते रहे। ढोल-नगाड़ों के बीच मनाखेड़ा पहुंचे सीवन पुत्रों का ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। संगम धाम पर पहली बार 25 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई गई।
मां सीवन की पूजा के बाद शुरू हुआ अभियान
अभियान की शुरुआत सीहोर के महिला घाट पर मां सीवन की पूजा-अर्चना से हुई। सीवन पुत्र टीम के सदस्यों ने नदी में मछलियों को दाना डाला और मां सीवन का आशीर्वाद लेकर मनाखेड़ा स्थित संगम धाम के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान भारत माता और नदियों के संरक्षण से जुड़े नारे लगाए गए।
ढोल-नगाड़ों के साथ ग्रामीणों ने किया स्वागत
सीवन पुत्र टीम के मनाखेड़ा पहुंचने पर ग्रामीणों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी टीम के साथ संगम धाम तक पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच संगम स्थल तक पहुंची यात्रा ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया।
बच्चों से बुजुर्गों तक ने लिया नदी बचाने का संकल्प
संगम धाम पहुंचने के बाद सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने मौजूद लोगों को नदी संरक्षण और स्वच्छता की शपथ दिलाई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने नदियों को स्वच्छ रखने और जलधाराओं के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में नदी को केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन का आधार बताते हुए उसके संरक्षण पर जोर दिया गया।
पहली बार चढ़ी 25 मीटर लंबी चुनरी
संगम धाम पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद पहली बार 25 मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई गई। फकीर मोहम्मद ने इसमें सहयोग किया और नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक चुनरी लेकर पहुंचे। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने मां सीवन-पार्वती के जयकारे लगाए।
देशभक्ति गीतों ने बांधा समां
पूजा-अर्चना के बाद संगम धाम देशभक्ति के गीतों से गूंज उठा। अशोक नामदेव ने ‘न हिन्दू तू बनेगा, न मुसलमान बनेगा’ गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद वैभव राठौर ने ‘हे रीत जहां की प्रीत सदा’ गीत की प्रस्तुति दी। सीवन पुत्र कैलाश चव्हाण ने भी अपनी प्रस्तुति देकर माहौल को भावपूर्ण बनाया।
ग्रामीण बने ‘पार्वती पुत्र’, दिलाई संरक्षण की शपथ
कार्यक्रम में पार्वती नदी के संरक्षण के लिए ग्रामीणों को ‘पार्वती पुत्र’ के रूप में शपथ दिलाई गई और उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर रिटायर्ड आर्मी के सीवन पुत्र गोपाल आर्य का भी स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने नदी को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास करने की बात कही।
‘नदियां जन्म देने वाली मां से भी बढ़कर’
पार्वती पुत्रों ने नदी संरक्षण को लेकर अपनी भावनाएं भी व्यक्त कीं। महमूद अली ने कहा कि “नदियां जन्म देने वाली मां से भी बढ़कर हैं।” नसीब पटेल ने कहा कि जिन क्षेत्रों में नदियां होती हैं, वहां खुशहाली रहती है। नदियों को साफ-सुथरा रखना हम सभी का कर्तव्य है।
संगम को लेकर ग्रामीणों में दिखा गर्व
मनाखेड़ा के ग्रामीणों ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनके गांव में मां सीवन और मां पार्वती का पावन संगम है। ग्रामीणों के अनुसार यह संगम क्षेत्र की आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहर भी है और इसकी स्वच्छता एवं संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की है।
वरिष्ठ ग्रामीणों का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ सीवन पुत्र वीरेंद्र सिंह बिसौरिया, जितेंद्र राठौर, सतीश सीठा और मुकेश राय ने वरिष्ठ ग्रामीणों का स्वागत एवं सम्मान किया। संगम धाम की पूजा-अर्चना में लक्ष्मण सिंह चौकसे, राधेश्याम मकवाना, संतोष मेवाड़ा, जितेंद्र राठौर, हरिचरण दादा और कनीराम मालवीय ने सहभागिता की।
बड़ी संख्या में जुटे सीवन पुत्र
कार्यक्रम में गोपाल आर्य, वीरेंद्र सिंह बिसौरिया, प्रदीप साबू, जितेंद्र राठौर, सतीश सीठा, कैलाश चव्हाण, राधेश्याम मकवाना, कनीराम मालवीय, लक्ष्मण सिंह चौकसे, मुकेश राय, संतोष मेवाड़ा, हरिचरण दादा, सुनील राठौर, योगेंद्र राय, नसीब पटेल, महमूद पटेल, असलम खान, फकीर मोहम्मद, फारुक पटेल, शकील अली, शाहरुख पटेल, शाहिद अली, अनीस खान, प्रकाश यादव, जगदीश वर्मा, कमल केवट, सचिन प्रजापत और धर्मेंद्र खत्री सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं सीवन पुत्र मौजूद रहे।
अभियान ने दिया आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश
सीवन-पार्वती संगम धाम पर आयोजित यह अभियान केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के माध्यम से नदियों को स्वच्छ रखने, जलधाराओं के संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया। सीवन पुत्र टीम ने संगम धाम को व्यापक पहचान दिलाने और नदी संरक्षण के अभियान को लगातार आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।



















