Bijapur:पामेड़ की बेटियों की दर्दनाक पढ़ाई,15-20 किमी पैदल स्कूल पहुंच रहीं छात्राएं, हॉस्टल की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं

बीजापुर: पामेड़ की बेटियों की पढ़ाई के रास्ते में दूरी और दुर्गम सड़कें सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं। 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचने वाली दो दर्जन से अधिक छात्राएं हॉस्टल की मांग लेकर बीजापुर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। छात्राओं ने प्रशासन से स्थायी हॉस्टल के साथ तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा से लगे पामेड़ क्षेत्र की स्कूली छात्राओं की पढ़ाई मुश्किलों में घिर गई है। आसपास के गांवों से आने वाली छात्राओं को रोजाना 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। हॉस्टल की सुविधा नहीं होने और पक्की सड़क के अभाव में छात्राओं की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
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हॉस्टल की मांग लेकर पहुंचीं बेटियां
बीजापुर पामेड़ क्षेत्र की दो दर्जन से अधिक छात्राएं शुक्रवार को टैक्सी से बीजापुर पहुंचीं। छात्राओं ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने पामेड़ में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाली छात्राओं के लिए स्थायी छात्रावास बनाने की मांग रखी।

7 गांवों की छात्राओं को रोज लंबा सफर
छात्राओं ने बताया कि पामेड़ में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर की छात्राओं के लिए हॉस्टल नहीं है। इसके चलते कवरगट्टा, धर्माराम, जीडपल्ली, सपेड़, मीनागट्टा, उड़तमल्ला और रासपल्ली सहित आसपास के गांवों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
15-20 किमी पैदल सफर, रास्ते भी दुर्गम
छात्राओं के मुताबिक क्षेत्र में अब तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं है। कच्चे और दुर्गम रास्तों से होकर उन्हें स्कूल पहुंचना पड़ता है। रोजाना इतनी लंबी दूरी पैदल तय करने से पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
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समय पर स्कूल पहुंचना भी मुश्किल
लंबे और कठिन सफर के कारण कई छात्राएं समय पर स्कूल नहीं पहुंच पातीं। स्कूल से घर लौटने में भी काफी समय लग जाता है। छात्राओं ने बताया कि लगातार बनी इस परेशानी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बेटियों की पढ़ाई छूटने का खतरा
छात्राओं का कहना है कि दूरी और आवागमन की समस्या के कारण कई अभिभावक अपनी बेटियों की पढ़ाई छुड़ाने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ छात्राएं पहले ही स्कूल छोड़ चुकी हैं। ऐसे में हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने पर सीमावर्ती क्षेत्र की बेटियों की पढ़ाई पर और गंभीर असर पड़ सकता है।
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पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी पहुंचे साथ
छात्राओं के साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमलेश कारण भी जिला शिक्षा अधिकारी से मिले। उन्होंने छात्राओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान की मांग रखी। कमलेश कारण के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी ने स्थायी हॉस्टल बनने तक छात्राओं के लिए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है।
DEO बोले- कलेक्टर के संज्ञान में लाएंगे मामला
जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडे ने बताया कि छात्राओं का आवेदन प्राप्त हुआ है। छात्राओं ने स्थायी हॉस्टल के साथ तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर आवश्यक और उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन से जल्द हॉस्टल बनाने की मांग
छात्राओं ने प्रशासन से पामेड़ में जल्द स्थायी छात्रावास बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि हॉस्टल की सुविधा मिलती है तो सीमावर्ती गांवों की बेटियां बिना रोजाना लंबा पैदल सफर किए अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।












