kanker:भालू के खौफ से गांव में बवाल,स्कूल बंद करने पर अड़े ग्रामीण, कलेक्टर-विधायक को मौके पर बुलाने की मांग

कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मरकाटोला गांव में मादा भालू के हमले में दो ग्रामीणों की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्साफूट पड़ा है। भालुओं के लगातार गांव में आने से डरे ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि स्कूल और भालू प्रभावित पहाड़ी की बाउंड्रीवाल बनने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाएगा।
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दो मौतों के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन
कांकेर जिले के मरकाटोला गांव में दो दिन पहले मादा भालू के हमले में दो ग्रामीणों की मौत के बाद ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। लगातार भालुओं की आवाजाही से डरे ग्रामीण अब धरने पर बैठ गए हैं और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं

स्कूल की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
ग्रामीणों का कहना है कि जिस पहाड़ी पर बड़ी संख्या में भालुओं की मौजूदगी है, उसी से गांव का हायर सेकेंडरी स्कूल लगा हुआ है। स्कूल में बाउंड्रीवाल नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक स्कूल की बाउंड्रीवाल नहीं बनेगी, तब तक बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे।
पूरी पहाड़ी की घेराबंदी की मांग
ग्रामीणों ने केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरी पहाड़ी क्षेत्र की बाउंड्रीवाल बनाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इससे भालू गांव की ओर नहीं आ सकेंगे और लोगों की जान सुरक्षित रहेगी।
रात में घरों तक पहुंच रहे भालू
ग्रामीणों के मुताबिक, बीती रात भी कई भालू गांव के घरों तक पहुंच गए थे। इतना ही नहीं, दो दिन पहले जिन दो ग्रामीणों का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, उस दौरान भी दो भालू आसपास घूमते हुए दिखाई दिए। इससे गांव में दहशत और बढ़ गई है।
बच्चों और ग्रामीणों की जान पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चे और गांव के लोग उसी रास्ते से गुजरते हैं, जो भालू प्रभावित पहाड़ी के पास से होकर निकलता है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए भालुओं को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ने और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करने की मांग की जा रही है।

प्रशासन पहुंचा, लेकिन नहीं माने ग्रामीण
धरने की सूचना मिलने पर नरहरपुर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी भी पहुंचे और उन्होंने स्कूल की बाउंड्रीवाल के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत होने की जानकारी दी। इसके बावजूद ग्रामीण धरना खत्म करने को तैयार नहीं हुए।
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कलेक्टर और विधायक को बुलाने पर अड़े
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक जिला कलेक्टर और स्थानीय विधायक आशाराम नेताम मौके पर नहीं पहुंचेंगे और उनकी सभी मांगों पर भरोसा नहीं देंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।












