Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

बिल भरो, नहीं तो कनेक्शन कट जाएगा...फिर आई ठगी की लिंक, मंडीदीप-गोविंदपुरा के उद्योगों को MPIDC के नाम पर कॉल

मंडीदीप और गोविंदपुरा के उद्योगपतियों को MPIDC अधिकारी बनकर फर्जी कॉल किए गए। बकाया बिल की सही जानकारी देकर भुगतान कराया गया और बाद में रिकॉर्ड अपडेट करने के नाम पर लिंक व APK भेजे गए। एक उद्योगपति के संदेह के बाद साइबर ठगी के प्रयास का खुलासा हुआ।
बिल भरो, नहीं तो कनेक्शन कट जाएगा...फिर आई ठगी की लिंक, मंडीदीप-गोविंदपुरा के उद्योगों को MPIDC के नाम पर कॉल
फाइल फोटो

भोपाल। “मैं जोशी, MPIDC से बोल रहा हूं। आपका वॉटर बिल जमा नहीं हुआ है। जल्दी जमा कर दीजिए, नहीं तो कनेक्शन काट दिया जाएगा।”  मंडीदीप के उद्योगपति एसके वर्मा को मंगलवार दोपहर इसी तरह का फोन आया। फोन करने वाले ने MPIDC का नाम लिया और बिल जमा नहीं करने पर कनेक्शन काटने की धमकी दी। इसके बाद +91 7291085436 नंबर से मैसेज भी आया, जिसमें MPIDC का लोगो और अधिकारी के नाम प्रवीण जोशी के साथ मोबाइल नंबर –06294280800 दर्ज था। बकाया बिल की जानकारी सही होने से वर्मा ने एमपीआईडीसी की साइट पर बिल जमा कर दिया। इसके बाद इसी नंबर 06294280800 पर बिल जमा करने की जानकारी देने के लिए कॉल किया  गया। फोन करने वाले ने कहा कि वह एक लिंक भेज रहा है, उसे खोलकर बिल की डिटेल सबमिट कर दें, ताकि रिकॉर्ड अपडेट हो जाए। यह भी कहा गया कि लिंक से जानकारी अपडेट नहीं करने पर भुगतान रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देगा। इसके बाद इसी नंबर से APK फाइल भेजी गई। फाइल देखकर वर्मा को संदेह हुआ और उन्होंने उसे ओपन नहीं किया। MPIDC से संपर्क करने पर साइबर ठगी के प्रयास का खुलासा हुआ।

कई उद्योगपतियों को इसी तरह कॉल

मंडीदीप और गोविंदपुरा के कुछ अन्य उद्योगपतियों को भी इसी तरह के फोन आने की जानकारी सामने आई है। कुछ ने बिल जमा भी कर दिए। बाद में भुगतान अपडेट करने के नाम पर लिंक या APK भेजे जाने से उन्हें संदेह हुआ। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों के मोबाइल में APK इंस्टॉल हुआ या किसी के बैंक खाते से राशि निकली। उद्योगपतियों के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि ठगों के पास बकाया बिल और मोबाइल नंबर जैसी सटीक जानकारी कैसे पहुंची। उद्योगों का बिल संबंधी रिकॉर्ड MPIDC से जुड़ा है। ऐसे में डेटा के स्रोत की जांच की जरूरत है। उद्योगपतियों के मुताबिक जिन मामलों की जानकारी सामने आई है, उनमें बिल की राशि करीब 9 हजार से 36 हजार रुपए तक थी। कुछ लोगों ने राशि कम होने के कारण औपचारिक शिकायत नहीं की।

ये भी पढ़ें: DRI की कार्रवाई-इंदौर में 1.19 करोड़ की ड्रग्स के साथ नाइजीरियाई महिला गिरफ्तार

भुगतान के बाद APK फाइल बनी खतरे का संकेत

इस मामले में ठगी का तरीका भी सामने आया है। पहले बकाया बिल की सही जानकारी देकर भरोसा कायम किया गया। भुगतान के बाद “रिकॉर्ड अपडेट” करने के नाम पर लिंक भेजी गई और फिर APK फाइल भेजकर उसे खोलने का दबाव बनाया गया। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार अनजान स्रोत से मिली APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करना मोबाइल और बैंकिंग जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

रिकॉर्ड अपडेट करने के नाम पर आई लिंक

बिल जमा करने के बाद रिकॉर्ड अपडेट करने के नाम पर लिंक भेजी गई थी। शक होने पर उसे नहीं खोला और MPIDC को सूचना दी।

एसके वर्मा, उद्योगपति, मंडीदीप

साइबर पुलिस को दी सूचना

उद्योगपतियों को अधिकृत साइट और लिंक से ही बिल भुगतान करने तथा ऑनलाइन भुगतान से पहले क्रॉस चेक करने की सलाह दी है। मामले की सूचना साइबर पुलिस को भी दी गई है।

विशाल चौहान, ईडी, MPIDC

ये भी पढ़ें: सागर जहरीली शराब कांड पर जबलपुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, 32 आरोपी गिरफ्तार

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

Latest Posts