नंदीग्राम उपचुनाव: मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, बोला- जमानत मिले तो चुनाव लड़ने दें

मिलन प्रधान पर कुल 11 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है, जिनमें से पांच मामलों में उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में उन्हें अलग-अलग अदालतों से न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी, जबकि प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा। प्रधान के वकील ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक वजह का आरोप लगाया है, जबकि राज्य सरकार ने कहा कि कार्रवाई लंबित वारंट के आधार पर हुई है।
2007 के पुराने मामलों में फंसे हैं मिलन प्रधान
मिलन प्रधान नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और उनके खिलाफ 11 मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें से कई मामले 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे। पुलिस और अदालत की कार्रवाई के बाद वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा, अपहरण, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
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दो अदालतों से न्यायिक हिरासत का आदेश
प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने 19 सितंबर को 2007 से जुड़े चार मामलों में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा। इसके बाद कांथी कोर्ट ने 21 सितंबर को करीब दो दशक पुराने आर्म्स एक्ट मामले में भी उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अलग-अलग मामलों की इन कार्रवाइयों के कारण उनकी चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
जमानत मिली तो चुनाव लड़ने का रास्ता खुला
मंगलवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में प्रधान की याचिका पर सुनवाई हुई। इसी दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि अगर प्रधान को जमानत मिल जाती है, तो उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने दिया जाए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की है। यानी चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से जमानत मिलने की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
पांच मामलों में राहत नहीं मांग रहे थे प्रधान
प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि वे उन पांच मामलों में फिलहाल राहत नहीं मांग रहे हैं, जिनमें प्रधान पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उन्होंने छह अन्य मामलों में पुलिस की जबरन कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार के समय वापस लिए जा चुके थे, जबकि बाकी एक मामले में प्रधान वांटेड नहीं हैं।
गिरफ्तारी पर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलील
प्रधान के वकील ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी धड़े से समर्थन मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई और गिरफ्तारी का समय सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर, एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि गिरफ्तारी किसी राजनीतिक फैसले के आधार पर नहीं, बल्कि निचली अदालत के पुराने वारंट के आधार पर हुई है। राज्य सरकार के मुताबिक यह वारंट 2007 के एक आपराधिक मामले में जारी हुआ था और 2021 से लंबित था।
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6 अक्टूबर को मतदान, 4 अक्टूबर को खत्म होगा प्रचार
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और 4 अक्टूबर को प्रचार का आखिरी दिन रहेगा। ऐसे में अगर प्रधान को समय रहते जमानत नहीं मिलती है, तो उनके लिए खुद मैदान में उतरकर प्रचार करना मुश्किल रहेगा। नंदीग्राम सीट 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने जीती थी, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट भी जीतने के बाद उन्होंने नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। नंदीग्राम की राजनीति में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अहम भूमिका रही है। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी के राजनीतिक अभियान को बड़ा आधार दिया था और उस दौर में सुवेंदु अधिकारी ने भी आंदोलन में भूमिका निभाई थी। अब करीब दो दशक पुराने मामलों में कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट की सुनवाई ने उपचुनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।




















