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यूपी की 10 राज्यसभा सीटों ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी-एनडीए की 7, सपा की 2 सीटों के पीछे क्या है गणित?

उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान और इसी दिन मतगणना कराने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मौजूदा विधानसभा गणित में बीजेपी और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत है, जबकि सपा के खाते में दो सीटें जाने का गणित बन रहा है।
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों ने बढ़ाई सियासी हलचल, बीजेपी-एनडीए की 7, सपा की 2 सीटों के पीछे क्या है गणित?
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों ने बढ़ाई सियासी हलचल

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में आठ बीजेपी, एक सपा और एक बसपा के पास है। इन सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होना है, जबकि डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद उनकी सीट पहले ही खाली हो चुकी है। 397 की प्रभावी विधानसभा संख्या के हिसाब से एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होंगे। मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी-एनडीए आठ सीटों के लिए पर्याप्त ताकत रखता है, जबकि सपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है। बसपा के पास यूपी विधानसभा में कोई विधायक नहीं है, इसलिए रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की राज्यसभा में भी कोई सीट नहीं बचेगी।

25 नवंबर को खत्म होगा 10 सांसदों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें 25 नवंबर को खाली हो रही हैं। इनमें बीजेपी की आठ, सपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल है। बीजेपी से बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। डॉ. दिनेश शर्मा भी इसी सूची में थे, लेकिन अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। सपा के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।

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16 अक्टूबर को होगा मतदान, इसी दिन आएगा रिजल्ट

चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक नाम वापस ले सकेंगे। यूपी की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी।

397 विधायक, एक सीट के लिए करीब 37 वोट जरूरी

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन छह विधायकों के निधन के बाद प्रभावी संख्या 397 रह गई है। राज्यसभा चुनाव में विधायक अपने वोट डालते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से होता है। मौजूदा संख्या के हिसाब से एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होंगे। इसी गणित के कारण विधानसभा में दलों की संख्या राज्यसभा की इन 10 सीटों के नतीजे तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

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बीजेपी-एनडीए के पास 8 सीटों का गणित

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास इतनी ताकत है कि वह आठ उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है। बीजेपी के पास 256 विधायक बताए जा रहे हैं, जबकि सहयोगियों को जोड़कर एनडीए की संख्या 289 के आसपास पहुंचती है। निर्दलीय और अन्य समर्थक विधायकों के समर्थन को जोड़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ता है। हालांकि सहयोगियों के रुख को लेकर अलग-अलग गणित लगाए जा रहे हैं, इसलिए अंतिम संख्या उम्मीदवारों और मतदान के समय के समीकरण पर निर्भर करेगी।

सपा के दो उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त संख्या

सपा के पास विधानसभा में 101 विधायक हैं, जिससे पार्टी के दो उम्मीदवारों के लिए जरूरी वोटों का गणित बनता है। दो सीटों के लिए करीब 74 वोट चाहिए होंगे और मौजूदा संख्या के हिसाब से सपा के पास इसके बाद भी कुछ वोट बच सकते हैं। यही वजह है कि मौजूदा विधानसभा गणित में सपा के दो राज्यसभा उम्मीदवारों के जीतने की संभावना का आंकलन किया जा रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन और मतदान के समय सामने आने वाले समर्थन पर निर्भर करेगी।

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बसपा की राज्यसभा में भी खत्म होगी मौजूदगी

बसपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि पार्टी के पास उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब कोई विधायक नहीं है। राज्यसभा में फिलहाल बसपा के एकमात्र सदस्य रामजी गौतम हैं, जिनका कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बसपा के पास अपना उम्मीदवार जिताने के लिए जरूरी वोट नहीं हैं। ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद बसपा की संसद के दोनों सदनों में मौजूदगी खत्म हो जाएगी।

बचा वोट 10वीं सीट का गणित बदल सकता है

राज्यसभा की 10 सीटों में बीजेपी-एनडीए और सपा की संख्या के बाद भी वोटों का कुछ हिस्सा बचने का गणित है। एनडीए अगर सात या आठ सीटों के लिए अपने उम्मीदवार उतारता है, तो बचे हुए वोटों और दूसरी वरीयता के वोटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि मौजूदा विधानसभा संख्या बीजेपी-एनडीए को आठ सीटों पर बढ़त देती है और सपा को दो सीटों का गणित उपलब्ध कराती है। उम्मीदवारों की संख्या, क्रॉस-वोटिंग और दूसरी पसंद के वोटों से अंतिम मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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