Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

70 हजार शिक्षकों को राहत, पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने के आदेश पर हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते का समय दिया

मध्यप्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षकों की सेवा अवधि पहली नियुक्ति से जोड़ने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते में आदेश का पालन करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही SLP खारिज कर चुका है।
70 हजार शिक्षकों को राहत, पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने के आदेश पर हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते का समय दिया
File Photo

मध्यप्रदेश में हजारों शिक्षकों की सेवा अवधि और उससे जुड़े लाभों के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामला शिक्षकों की सेवा अवधि को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से जोड़ने से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि यदि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना की जाती है तो उन्हें वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभ मिल सकते हैं। इस मामले से करीब 70 हजार शिक्षक प्रभावित होने की बात सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके बाद शिक्षकों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आदेश का पालन कराने की मांग की गई।

अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया चार सप्ताह का समय

अवमानना याचिका पर सुनवाई जस्टिस दीपक खोट की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का पालन करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह की मोहलत दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से एएस बघेल ने पैरवी की।

पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने की मांग

मामले में राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान उनकी पहली नियुक्ति से पहले की शिक्षकीय सेवा को सेवा अवधि की गणना में उचित तरीके से शामिल नहीं किया गया। शिक्षकों ने मांग की थी कि उनकी सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए। उनका कहना है कि इससे सेवा की वास्तविक अवधि के आधार पर वरिष्ठता तय करने के साथ वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिल सकेंगे।

ये भी पढ़ें: पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, गृह सचिव और प्रमुख सचिव उद्योग को हाईकोर्ट का नोटिस, शक्कर कारखाने के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप

छठे वेतनमान का 2006 से लाभ देने की मांग

शिक्षकों का एक प्रमुख तर्क छठे वेतनमान से जुड़ा है। उनका कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया गया। शिक्षकों के मुताबिक यदि पहली नियुक्ति से उनकी सेवा अवधि को मान्यता दी जाती है तो वे 2006 से ही छठे वेतनमान के लाभ के पात्र हो सकते हैं। इस आधार पर करीब 10 साल के बकाया का दावा सामने आ रहा है।

7 से 8 लाख रुपये तक के बकाए का दावा

शिक्षकों के मुताबिक सेवा अवधि और वेतनमान के अंतर के आधार पर प्रत्येक शिक्षक को करीब 7 से 8 लाख रुपये तक का बकाया मिल सकता है। इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की बात भी शिक्षकों की ओर से कही गई है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि सेवा अवधि और वेतन निर्धारण में बदलाव होने पर उनके मासिक वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपये तक का अंतर आ सकता है। हालांकि वास्तविक बकाया राशि और वेतन में होने वाला अंतर संबंधित शिक्षक की नियुक्ति, सेवा अवधि, वेतन निर्धारण और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में आए आदेश के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार ने विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी दाखिल की थी। 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके बाद शिक्षकों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई और पूर्व आदेश का पालन कराने की मांग की गई। अब हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।

ये भी पढ़ें: भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट पर अभी और इंतजार, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पर टली सुनवाई

600 से ज्यादा दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति

इसी बीच शिक्षक संगठनों ने 600 से ज्यादा दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के फैसले के लिए राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग का आभार जताया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के लिए अनुकंपा नियुक्ति आर्थिक और सामाजिक सहारा उपलब्ध कराने में मदद करेगी। संगठनों ने इसे लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अब शिक्षकों की नजर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन पर है। चार सप्ताह की समयसीमा पूरी होने के बाद सरकार की ओर से की गई कार्रवाई और अक्टूबर में होने वाली अगली सुनवाई से मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

Latest Posts