MP में बढ़ा दूध का उत्पादन, किसानों को है 5 रुपए लीटर बोनस का इंतजार

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रमुख डेयरी ब्रांड ‘सांची’ दुग्ध संघ का नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) में मर्जर होने के बाद उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 1 साल के दौरान यह वृद्धि करीब 5 -6 फीसदी है। प्रदेश में अब दुग्ध उत्पादक किसानों को प्रति लीटर 5 रुपए बोनस का इंतजार है।
सरकार ने सहकारी समितियों के जरिए दूध बेचने वाले किसानों को बोनस राशि देने का ऐलान किया था। प्राइवेट सेक्टर दूध का खरीद मूल्य ज्यादा होने से किसान पसोपेश में हैं। मप्र सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले मप्र के पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने और डेयरी उद्योग को सशक्त बनाने बोनस राशि देने का ऐलान किया था। सांची दुग्ध संघ का नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड में मर्जर के बाद दुग्ध उत्पादकों की आमदनी में आंशिक बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
प्राइवेट सेक्टर है चुनौती
दुग्ध संघ के सूत्रों का कहना है कि इंदौर और भोपाल दुग्ध संघ द्वारा किसानों को 8 रुपए 40 पैसे प्रति फैट दूध का भुगतान किया जा रहा है। जबकि उज्जैन दुग्ध संघ द्वारा 8 रुपए प्रति फैट खरीद मूल्य तय किया गया है। यह विडंबना ही है कि मप्र के दुग्ध संघ में ही किसानों को अलग-अलग खरीद मूल्य दिया जा रहा है। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर में 9.50 रुपए प्रति फैट दूध का भुगतान किया जा रहा है। इसलिए सहकारी दुग्ध संघों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ नहीं पा रहा।
मप्र का दूध उत्पादन : आंकड़ों के आईने में
- देश का 9 फीसदी दूध उत्पादन मप्र में
- मप्र: करीब 605 लाख किलोग्राम प्रतिदिन
- मप्र में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता : 644 ग्राम प्रतिदिन
- राष्ट्रीय औसत : 459 ग्राम प्रतिदिन
- भोपाल दुग्ध संघ : 3.20 लाख लीटर प्रतिदिन (पूर्व में 2.75 लाख लीटर उत्पादन था)
- उज्जैन : 1.80 लाख लीटर प्रतिदिन
- प्रदेश में कुल 7.5% पशुधन
- राष्ट्रीय औसत 5.05 प्रतिशत
उप्र, राजस्थान, गुजरात को पीछे छोड़ा
राज्य दुग्ध संघ का दावा है कि पिछले एक साल में पांच से छह प्रतिशत दूध का कलेक्शन बढ़ा है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में उत्पादन घटा है। मप्र के और आगे बढ़ने के संकेत हैं।












