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Donald Trump Tarrif :ट्रंप के टैरिफ ने दिया अमेरिका को बड़ा झटका, कई कंपनियां हो रही दिवालिया

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के वे व्यवसाय जो सीधे तौर पर आयात पर अधिक निर्भर थे, उन्हें बीते दशकों में सबसे ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ा।
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ट्रंप के टैरिफ ने दिया अमेरिका को बड़ा झटका, कई कंपनियां हो रही दिवालिया
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कई दिनों से विभिन्न देशों पर लगे टैरिफ से होने वाली मोटी कमाई का जिक्र कई बार कर रहे हैं। वे भले ही टैरिफ को सही साबित करने के लिए तमाम दावे लगा रहे हैं। जिसमें वे इसे अमेरिका में रेवेन्यू में वृद्धि करने वाला बताते हों, लेकिन अमेरिका में तस्वीर इससे बिल्कुल विपरीत दिख रही है।

    रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिका में कंपनियों के दिवालिया होने के मामले इस साल 2025 में 15 साल के हाई पर पहुंच गए हैं। इधर देश की कई कंपनियां इस हालात की बड़ी वजह ट्रंप टैरिफ को बता रही हैं। इसके साथ ही देश में बढ़ती महंगाई ने स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया है, जिससे उद्योग क्षेत्र निचले स्तर पर जा पहुंचा है। 

    कई कंपनियों पर फूंटी दिवालियापन की गाज

    द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अमेरिका में कंपनियों के दिवालिया होने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में अब तक अमेरिकी कंपनियों के बैंक रिप्टी केस 2024 के पहले 11 महीनों की तुलना में करीब 14% ज्यादा रहे हैं। यह आंकड़ा महामंदी  के बाद से सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है और साल 2010 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।

    दूसरी ओर विशेषज्ञों कहते हैं कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें ट्रंप टैरिफ, बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और कमजोर उपभोक्ता मांग प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों ने खासतौर पर मिड-साइज और कर्ज में डूबी कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है।

    क्या है चैप्टर 11 और चैप्टर 7?

    अमेरिकी दिवालिया कानून के तहत चैप्टर 11 को रीऑर्गनाइजेशन कहा जाता है। इसके तहत कंपनी अदालत की निगरानी में अपने कर्जों का पुनर्गठन करती है और कारोबार को जारी रखने की अनुमति मिलती है, ताकि भविष्य में कंपनी को दोबारा खड़ा किया जा सके।

    वहीं चैप्टर 7 के तहत कंपनी का पूर्ण परिसमापन (Liquidation) किया जाता है। इसमें कंपनी की संपत्तियां बेचकर कर्जदाताओं का भुगतान किया जाता है और इसके बाद कंपनी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में न सिर्फ दिवालिया मामलों की संख्या बढ़ी है, बल्कि बड़े और स्थापित ब्रांड्स भी इस दबाव से अछूते नहीं रहे हैं।

    आयात निर्भर बिजनेस पर सबसे ज्यादा असर

    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के वे व्यवसाय जो सीधे तौर पर आयात पर अधिक निर्भर थे, उन्हें बीते दशकों में सबसे ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ा। दिवालियापन के लिए आवेदन दाखिल करने के मामलों में सबसे तेज बढ़ोतरी इंडस्ट्रियल सेक्टर में दर्ज की गई है, जिसमें निर्माण, विनिर्माण और परिवहन कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    दिवालियापन का आवेदन करने वाली अधिकांश कंपनियों ने अपनी वित्तीय मुश्किलों के लिए बढ़ती महंगाई (US Inflation) और ऊंची ब्याज दरों (Policy Rates) को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही कंपनियों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों ने सप्लाई चेन को बाधित किया, जिससे लागत में इजाफा हुआ और कारोबारी दबाव और बढ़ गया।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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